ईमानदार साहूकार और किसान

एक गरीब किसान एक दिन एक साहूकार के पास अपनी जमीन बेचने गया, बोला राम राम साहूकार जी, मेरी 2 एकड़ जमीन आप रख लो.
 
        साहूकार बोला क्या कीमत है आपकी जमीन कि ?

    गरीब किसान बोला, 50 हजार रुपये.

      साहूकार थोड़ी देर सोचने के बाद बोला, वो जमीन जिस खेत में ट्यूबवेल लगा है ?
 
      किसान जी साहूकार साहिब, आप मुझे 50 हजार से कुछ कम भी देंगे, तो जमीन आपको दे दूँगा.

       साहूकार ने आँखें बंद कीं, सोच विचार कर बोला, उस जमीन की कीमत तो कम से कम 2 लाख होगी, आप उसको इतने सस्ते दाम में क्यों बेचना चाहते हो 
 
किसान पर मैं तो 50 हजार मांग रहा हूँ, 

       साहूकार बोला, तुम जमीन क्यों बेच रहे हो ?

      किसान बोला, बेटी की शादी करनी है इसीलिए मज़बूरी में बेचनी पड़ रही है 

     साहूकार बोला, मुझे जमीन खरीदनी है, किसी की मजबूरी नहीं खरीदनी, अगर आपकी जमीन की कीमत मुझे मालूम है तो मुझे आपकी मजबूरी का फायदा नहीं उठाना चाहिए, हमारे भगवान कभी खुश नहीं होगे मुझपर इस सौदे से, ऐसी जमीन या कोई भी साधन, जो किसी की मजबूरियों को देख के खरीदा जाये वो जिंदगी में कभी सुख नहीं देता, और आने वाली पीढ़ीयो को भी दुःख भोगना पड़ता है 
 
      साहूकार ने कहा, मेरे मित्र तुम खुशी खुशी, अपनी बेटी की शादी की तैयारी करो, भगवान पर भरोसा रखो वो सब सही करेंगे, आपकी बेटी हम अब गांब बालो की बेटी है, 50 हजार की व्यवस्था हम गांव वाले मिलकर कर लेंगे, ओर आपकी जमीन भी आपकी ही रहेगी,  
  
      किसान हाथ जोड़कर नीर भरी आँखों के साथ साहूकार को दुआयें देता चला गया।
 
      ऐसा जीवन हम भी बना सकते हैं.

   बस किसी की मजबूरी न खरीदें, किसी के दर्द, मजबूरी को समझ कर, सहयोग करना ही सच्चा तीर्थ है, एक यज्ञ है. सच्चा कर्म और बन्दगी है.

।।जय श्री राम जी।।
प्रभु श्री राम सबका भला करें 
सबको सदबुद्धि दें

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