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शनिवार, 28 जनवरी 2023

भारत ने किया 7500km/h की रफ्तार के हाइपरसोनिक हथियार का परीक्षण; जाने विस्तार में

hypersonic weapon

भारत ने 27 जनवरी शुक्रवार को अपने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफल परीक्षण किया। इसे संक्षेप में HSTDV भी कहते हैं। इसका परीक्षण ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप के तट पर किया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इस हथियार का पहला परीक्षण 2019 में किया था। यह हथियार क्या है और इसे क्यों बनाया गया, इसके बारे में भी आप जान लीजिए। हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) एक मिसाइल जैसा हथियार है जिसे हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। (हाइपरसोनिक ऑब्जेक्ट्स को ध्वनि की गति से पांच गुना तेज बताया जाता है) एएनआई के एक अपडेट में रक्षा सूत्रों के हवाले से इसके सफल परीक्षण की जानकारी दी गई है। इससे पहले भी 2019 में इसका परीक्षण किया गया था जो इसका पहला परीक्षण था। दरअसल, 2008 में डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा था कि प्रोजेक्ट का उद्देश्य स्क्रैम जेट इंजन की क्षमता को प्रदर्शित करना है कि स्क्रैम जेट इंजन 15 से 20 किमी की ऊंचाई पर कैसा प्रदर्शन करता है। इस इंजन की मदद से यह यान 7408 किलोमीटर प्रति घंटे यानी करीब 7500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। स्क्रैमजेट इंजन एक ऐसा इंजन है जिसे हाइपरसोनिक गति से संचालित किया जा सकता है। सामान्य जेट इंजन की तरह इसमें भी ईंधन भरा जाता है, लेकिन खास बात यह है कि यह उस ईंधन को जलाने के लिए वातावरण की ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है। साथ ही यह अपने अंदर प्रवेश करने वाली ऑक्सीजन को भी अपनी गति के कारण संकुचित कर देता है। जिसके बाद यह संकुचित हो जाता है और दहन कक्ष में पहुंच जाता है। इसलिए इसकी उड़ान का सिद्धांत ऐसा हो जाता है कि एक निश्चित गति तक पहुंचने के बाद ही इसका इंजन स्टार्ट होता है। इंजन शुरू करने से पहले, इसे सामान्य रूप से रॉकेट इंजन की तरह गति में लाया जाता है। एक सामान्य रॉकेट इंजन में ईंधन और ऑक्सीकारक दोनों मौजूद होते हैं, लेकिन इस सुपरसोनिक हथियार में केवल ईंधन ही मौजूद होता है। इसलिए यह ऐसे वातावरण में ही उड़ सकता है जहां पर्याप्त मात्रा में वायुमंडलीय ऑक्सीजन मौजूद हो। HSTDV के परीक्षण का मकसद यह है कि आने वाले समय में भारत इससे सुपरसोनिक मिसाइलें बना सकता है।

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