भगवान श्री हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव 6 अप्रैल दिन गुरुवार को है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी के प्रिय भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाती है। इस पर्व की मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से हनुमान जी अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर करते हैं। कहा जाता है कि यदि आप प्रभु श्री राम के दर्शन या पूजा करना चाहें तो हनुमान जी के दर्शन किए बिना पूजा सफल नहीं होती है। कुंडली में यदि अनिष्ट हो रहा है तो श्रद्धा पूर्वक केसरीनंदन माता अंजनी के पुत्र की पूजा करें, आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। साथ ही मंगल के अशुभ प्रभाव से भी आप बचे रहेंगे। श्री हनुमान जी को भगवान शिव का रुद्रावतार माना जाता है। उनका जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन मंगलवार को हुआ था। इसलिए मंगलवार के दिन इनकी विशेष पूजा की जाती है। हनुमान जी को एक ऐसे देवता के रूप में पूजा जाता है जो बुराई पर विजय पाने और सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता रखते है। इस त्योहार पर हनुमान जी के भक्त उनकी पूजा करते है और अपनी रक्षा और आशीर्वाद मांगते हैं। भक्त उनकी पूजा करने और प्रसाद चढ़ाने के लिए श्री हनुमान जी के मंदिरों में जाते हैं। श्री हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था। इसलिए इस दिन सुबह से ही मंदिर में प्रवचन और पूजा-पाठ का आयोजन किया जाता है। इस दिन हनुमान जी सहित माता सीता जी सहित भगवान राम और लक्ष्मण की पूजा की जाती है। प्रसाद के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू का भोग श्री हनुमान जी को लगाया जाता है और लाल रंग का सिंदूर भी अर्पित किया जाता है।
जिसकी कुंडली में मांगलिक दोष बना हुआ है, वह यह उपाय इस दिन कर मांगलिक दोष दूर कर सकते है। आए जानते है:
जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष बनता है। वह श्री हनुमान जन्मोत्सव के दिन ब्रह्म मुहूर्त में श्री हनुमान जी के मंदिर में जाकर सुंदरकांड का पाठ करने के साथ गाय के घी का दीपक जलाए ऐसा करने से मांगलिक दोष से मुक्ति मिलती है।
रोग पर विजय पाने के लिए इस चौपाई का जाप करें
नासे रोग जपे सब पीरा, जप निरन्तर हनुमत बीरा॥
अर्थात: यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन सुबह-शाम नियमित रूप से और मन लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ करता है। वह सभी रोगों और कष्टों से छुटकारा पाता है और उसकी तन और मन की पीड़ा शान्त होती है, सत्कर्मों की ओर ध्यान खींचा जाता है।
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