हाल
ही में फ्रांस, ब्रिटेन
और जर्मनी (जिन्हें E3 कहा जाता है)
ने ईरान के खिलाफ
संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने की चेतावनी दी है। इसके
पीछे कारण है - ईरान
का 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) की शर्तों का
पालन न करना।
E3 देशों
ने अगस्त 2025 तक की अंतिम
समय-सीमा तय की है।
अगर तब तक ईरान:
- अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता शुरू नहीं करता,
- अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की अनुमति नहीं देता,
- और अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडारण की जानकारी नहीं देता,
तो स्नैपबैक मैकेनिज्म लागू किया जा
सकता है।
स्नैपबैक
मैकेनिज्म क्या है?
स्नैपबैक
मैकेनिज्म
2015 के जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) का एक हिस्सा
है। यह सिस्टम इसीलिए
बनाया गया था ताकि
अगर ईरान समझौते का
उल्लंघन करे, तो संयुक्त
राष्ट्र के प्रतिबंध बिना किसी नई वोटिंग के फिर से लागू हो सकें।
इस तंत्र की खास बात
यह है कि इसमें:
- किसी देश का वीटो (जैसे रूस या चीन का) निष्प्रभावी होता है,
- कार्रवाई स्वचालित रूप से होती है — यानी लंबी बहस या वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ती।
कैसे
काम करता है स्नैपबैक मैकेनिज्म?
- सूचना देना: समझौते से जुड़े देश UN महासचिव और सुरक्षा परिषद अध्यक्ष को ईरान की गंभीर चूक की जानकारी देते हैं।उदाहरण: तय सीमा से ज्यादा यूरेनियम संवर्धन, या निरीक्षण से इनकार।
- 30
दिन की प्रक्रिया: इस सूचना के बाद एक 30-दिन की अवधि दी जाती है। इस दौरान एक प्रस्ताव पास करना होता है कि क्या प्रतिबंधों से मिली छूट जारी रहेगी।
- अगर सहमति नहीं बनी: यदि 30 दिनों में कोई नया समझौता नहीं हुआ, तो सभी पुराने प्रतिबंध अपने-आप दोबारा लागू हो जाते हैं। यानी यह "स्नैपबैक" हो जाता है।
वीटो
क्यों नहीं चलता?
आमतौर
पर UN सुरक्षा परिषद में कोई भी
स्थाई सदस्य देश (जैसे रूस,
चीन, अमेरिका) किसी प्रस्ताव पर
वीटो लगा सकता है।
लेकिन इस मैकेनिज्म में
ऐसा नहीं होता।
इसे
खासतौर पर इस तरह
डिजाइन किया गया है
कि अगर ईरान समझौते
का उल्लंघन करे, तो बिना
किसी देरी या बाधा
के तुरंत कार्रवाई की जा सके।
ईरान
का क्या कहना है?
ईरान
ने यूरोपीय देशों की चेतावनी को
खारिज कर दिया है।
उसका तर्क है कि:
- अमेरिका पहले ही 2018 में JCPOA से बाहर हो चुका है, इसलिए अब वो समझौते के दायरे में नहीं आता।
- ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार करने का अधिकार है।
- यदि स्नैपबैक लागू किया गया, तो वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकल सकता है, जो कि एक गंभीर वैश्विक चिंता का विषय होगा।
स्नैपबैक
मैकेनिज्म एक ऐसा सिस्टम
है जो दुनिया को
ईरान के परमाणु कार्यक्रम
पर लगाम लगाने का
कानूनी और कूटनीतिक अधिकार
देता है। मौजूदा हालात
में इसकी सक्रियता से
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है
और वैश्विक शांति को खतरा हो सकता है।
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