नए लेबर कोड में बड़ा बदलाव: अब ग्रेच्युटी पाने के नियम हुए आसान – जानें आपको क्या फायदा मिलेगा

Gratuity Rules

केंद्र सरकार ने नए Labour Codes को लागू करने का फैसला कर लिया है। पहले जहां 29 पुराने श्रम कानून चल रहे थे, अब उनकी जगह 4 नए व्यापक लेबर कोड लागू होंगे। इनका मकसद पुराने नियमों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से अपडेट करना है। इन बदलावों में सबसे अहम है नए Gratuity Rules, जिसमें कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी पाने की पात्रता पूरी तरह बदल दी गई है।

 

सबसे बड़ा बदलाव: अब ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल की जरूरत नहीं

पहले के नियमों के अनुसार किसी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से-कम 5 साल लगातार काम करना जरूरी था।
लेकिन New Labour Code 2024 के लागू होने के बाद यह नियम बदल गया है।

अब क्या होगा?

अब Fixed Term Employees यानी निश्चित अवधि वाले कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी का अधिकार मिल जाएगा।

PIB की प्रेस रिलीज के अनुसार इस बदलाव का मकसद फिक्स्ड टर्म और स्थायी कर्मचारियों के बीच समानता लाना है।

 

नए ग्रेच्युटी नियम किन कर्मचारियों पर लागू होंगे?

ये नियम खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए हैं जो Fixed Term Contract पर काम करते हैं।
यानी जिनकी नौकरी एक निश्चित अवधि या प्रोजेक्ट की अवधि तक ही रहती है।

 

Fixed Term Employees कौन होते हैं?

Fixed Term Employment का मतलब है ऐसी नौकरी जिसमें कर्मचारी को एक तय लिखित कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखा जाता है।
जैसे ही कॉन्ट्रैक्ट खत्म होता है, नौकरी अपने आप समाप्त मानी जाती है।

यह मॉडल उन उद्योगों में ज्यादा इस्तेमाल होता है जहां प्रोजेक्ट-बेस्ड काम होता है, जैसे:

·         मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स

·         टेक्सटाइल उद्योग

·         कंस्ट्रक्शन सेक्टर

·         IT सर्विसेज

·         मीडिया और फिल्म प्रोडक्शन

·         लॉजिस्टिक्स

·         हॉस्पिटैलिटी

·         एक्सपोर्ट और ट्रेड आधारित उद्योग

 

कर्मचारियों को क्या-क्या फायदा मिलेगा?

नए लेबर कोड का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारी भी, स्थायी कर्मचारियों की तरह ही सभी सुविधाओं के हकदार होंगे।

नए नियमों से मिलने वाले फायदे:

·         1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी का लाभ

·         वेतन संरचना नियमित कर्मचारियों जैसी

·         छुट्टियों का पूरा अधिकार

·         मेडिकल सुविधाएं

·         EPF, ESI जैसे सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स

·         एक्सपोर्ट सेक्टर में अतिरिक्त सुरक्षा और लाभ

लेबर कोड साफ कहता है कि Fixed Term Workers = Permanent Workers
अर्थात वेतन, काम के घंटे, छुट्टियां, ग्रेच्युटी और सोशल सिक्योरिटी, सब बराबर मिलेगा।

 

कुल मिलाकर क्या बदलेगा?

इस बदलाव से निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों को अब अस्थायी या कैज़ुअल वर्कर नहीं माना जाएगा।
अब वे भी भारतीय औपचारिक रोजगार ढांचे का हिस्सा बनेंगे और उन्हें लंबी अवधि की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।