क्या भारत में महिला खतना पर लगेगा बैन? जानिए किन मुस्लिम देशों ने पहले ही लगा दी रोक
भारत में Female Genital Mutilation (FGM) यानी महिला खतना को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी ऐसी परंपरा को जारी नहीं रखा जा सकता, जो बच्चियों के स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों को प्रभावित करे।
क्या होता है Female Genital Mutilation (FGM)?
FGM एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिलाओं या बच्चियों के निजी अंगों में बिना चिकित्सीय आवश्यकता के कट या बदलाव किया जाता है। कई जगह इसे “खतना”, “खफ्ज” या “महिला खतना” के नाम से जाना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसे मानवाधिकारों के खिलाफ मानती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में संक्रमण, दर्द, मानसिक तनाव और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां देखने को मिलती हैं।
किन मुस्लिम देशों ने महिला खतना पर लगाया बैन?
दुनिया के कई मुस्लिम बहुल देशों ने इस प्रथा को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। इन देशों ने महिलाओं के स्वास्थ्य और मानवाधिकारों को प्राथमिकता देते हुए सख्त कानून बनाए हैं।
मिस्र
मिस्र ने साल 2008 में FGM पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में कानून को और सख्त बनाते हुए इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया।
सूडान
सूडान ने 2020 में कानून बदलकर महिला खतना को अपराध घोषित किया।
इंडोनेशिया
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देशों में शामिल इंडोनेशिया ने भी इस प्रथा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
अन्य देश
Djibouti, Senegal, Gambia और Uganda जैसे कई देशों में भी महिला खतना पर कानूनी रोक लगाई जा चुकी है।
भारत में अब तक बैन क्यों नहीं लगा?
भारत में यह मुद्दा मुख्य रूप से दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़ा माना जाता है। समुदाय का एक वर्ग इसे धार्मिक परंपरा बताता है, जबकि मानवाधिकार संगठनों और कई महिलाओं का कहना है कि यह बच्चियों के अधिकारों और स्वास्थ्य के खिलाफ है।
भारत में अभी तक FGM को लेकर कोई अलग विशेष कानून नहीं बनाया गया है। हालांकि कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कानूनों के तहत इस तरह की प्रक्रिया को अपराध माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
हालिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है। यदि कोई प्रथा बच्चों के स्वास्थ्य, गरिमा और मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है, तो उसकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
अब इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों की राय भी सुनी जा रही है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर बड़ा कानूनी फैसला देखने को मिल सकता है।
क्या इस्लाम में महिला खतना जरूरी है?
इस विषय पर मुस्लिम विद्वानों के बीच अलग-अलग राय मौजूद हैं। कई इस्लामी विद्वान मानते हैं कि FGM इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, जबकि कुछ समुदाय इसे परंपरा का हिस्सा बताते हैं।
निष्कर्ष
महिला खतना को लेकर भारत में बहस अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गई है। यह मामला महिलाओं के स्वास्थ्य, बच्चों के अधिकार और संविधान के मूल सिद्धांतों से भी जुड़ चुका है। दुनिया के कई मुस्लिम देशों द्वारा इस प्रथा पर रोक लगाने के बाद भारत में भी इस पर कानून बनाने की मांग लगातार तेज हो रही है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मुद्दे की दिशा तय कर सकता है।
