Shardiya Navratri 2026: अष्टमी-नवमी की तारीख को लेकर क्यों है असमंजस? जानें सप्तमी से दशहरा तक का पूरा कैलेंडर

Shardiya Navratri 2026

शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सप्तमी, महाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी की तिथियां विशेष महत्व रखती हैं। वर्ष 2026 में इन पर्वों की तारीखों को लेकर कुछ पंचांगों और प्रकाशित कैलेंडरों में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में व्रत रखने वाले भक्तों के लिए यह जानना जरूरी है कि अष्टमी पर कन्या पूजन कब करना है, नवमी का हवन किस दिन होगा और दशहरा किस तारीख को मनाया जाएगा।

पंचांग संबंधी उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना के साथ हुई। इस बार सप्तमी तिथि दो सूर्योदयों के दौरान पड़ने के कारण अष्टमी और नवमी के अनुष्ठानों को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है। द्रिक पंचांग और विभिन्न समाचार रिपोर्टों में दी गई तिथि-गणनाओं को देखते हुए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय तय करना उचित रहेगा।


शारदीय नवरात्रि 2026: प्रमुख तिथियां एक नजर में

पर्वतारीख
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत11 अक्टूबर 2026
महा सप्तमी17 अक्टूबर 2026
महाष्टमी19 अक्टूबर 2026, उदया तिथि के अनुसार
महानवमी20 अक्टूबर 2026, उदया तिथि के अनुसार
विजयादशमी / दशहरा20 या 21 अक्टूबर 2026, स्थानीय पंचांग के अनुसार पुष्टि करें

यह कैलेंडर सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। अष्टमी, नवमी और दशहरा की गणना में स्थानीय सूर्योदय तथा तिथि के समाप्त होने का समय महत्वपूर्ण हो सकता है।


महा सप्तमी 2026 कब है?

शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि मां दुर्गा की उपासना के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्ष 2026 के उपलब्ध पंचांग कैलेंडर में महा सप्तमी 17 अक्टूबर, शनिवार को दर्ज है।

इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा करते हैं। पूजा के दौरान दीप प्रज्वलित करना, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करना और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करना शामिल हो सकता है।

इस वर्ष सप्तमी तिथि के दो सूर्योदयों पर प्रभावी रहने के कारण कुछ कैलेंडरों में 18 अक्टूबर को भी सप्तमी का उल्लेख मिल सकता है। इसी वजह से अष्टमी की तारीख को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है।


महाष्टमी 2026 कब है? जानें कन्या पूजन की तारीख

नवरात्रि की महाष्टमी को दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। कई परिवारों में इसी दिन कन्या पूजन, भोग और विशेष आरती का आयोजन होता है।

द्रिक पंचांग पर आधारित 16 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होती है। उदया तिथि के आधार पर महाष्टमी 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जा सकती है।

हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं में व्रत और कन्या पूजन की व्यवस्था अलग हो सकती है। इसलिए भक्तों को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

एक प्रकाशित पंचांग-आधारित रिपोर्ट में 19 अक्टूबर के लिए निम्न समय दिए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:52 से 5:40 बजे तक

  • अमृत काल: सुबह 7:28 से 9:16 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक

ध्यान दें: ये समय संबंधित रिपोर्ट में प्रकाशित गणना पर आधारित हैं। पूजा का मुहूर्त शहर, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। पूजा करने से पहले अपने क्षेत्र का पंचांग जरूर देख लें।


कन्या पूजन की विधि क्या है?

नवरात्रि में कन्या पूजन को श्रद्धा और सम्मान से जुड़ी परंपरा माना जाता है। भक्त छोटी कन्याओं को देवी का प्रतीक मानकर उनका आदर-सत्कार करते हैं।

कन्या पूजन के दौरान सामान्य रूप से इन बातों का ध्यान रखा जाता है:

  1. पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां दुर्गा की आराधना करें।

  2. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्याओं और बटुक का स्वागत करें।

  3. कन्याओं के हाथ-पैर धोने की परंपरा हो तो उनकी सहमति और सहजता का ध्यान रखें।

  4. भोजन या प्रसाद श्रद्धापूर्वक परोसें।

  5. दक्षिणा या उपहार देना चाहें तो सम्मानपूर्वक दें और किसी पर कोई दबाव न डालें।

कन्या पूजन का मूल भाव श्रद्धा, सेवा और सम्मान है। इसे दिखावे के बजाय अपनी सामर्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना चाहिए।


महानवमी 2026 कब है? हवन और पूजा का महत्व

महानवमी नवरात्रि के प्रमुख धार्मिक अवसरों में से एक है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। कई श्रद्धालु इस अवसर पर दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और कन्या पूजन करते हैं।

प्रकाशित पंचांग-आधारित जानकारी के अनुसार, नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे समाप्त होती है। उदया तिथि के आधार पर महानवमी 20 अक्टूबर को मनाई जा सकती है।

जो भक्त अष्टमी और नवमी पर अलग-अलग अनुष्ठान करते हैं, उन्हें अपने व्रत के नियमों के अनुसार पूजा और पारण का समय तय करना चाहिए। हवन या कन्या पूजन के लिए एक ही समय सभी क्षेत्रों में लागू मानना उचित नहीं है।


दशहरा 2026 कब है? 20 या 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी?

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। उत्तर भारत में यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जुड़ा है, जबकि देश के कई अन्य हिस्सों में इसे मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है।

वर्ष 2026 के लिए प्रकाशित जानकारियों में दशहरा 20 अक्टूबर और 21 अक्टूबर, दोनों तारीखों पर दिखाई दे रहा है। कुछ समाचार रिपोर्टें 20 अक्टूबर को विजयादशमी बता रही हैं, जबकि कुछ पंचांग-आधारित गणनाएं दशमी तिथि के 20 अक्टूबर को दोपहर में शुरू होने और 21 अक्टूबर तक रहने की जानकारी देती हैं।

इस अंतर का संबंध तिथि की अवधि, सूर्योदय और स्थानीय धार्मिक परंपराओं से हो सकता है। इसलिए रावण दहन, शमी पूजन या अन्य विजयादशमी अनुष्ठानों का समय तय करने से पहले स्थानीय मंदिर या विश्वसनीय क्षेत्रीय पंचांग से पुष्टि करना बेहतर है।


नवरात्रि और दशहरे का धार्मिक महत्व

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और अपने परिवार की परंपराओं के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

दशहरा इस उत्सव का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह पर्व लोगों को सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। अलग-अलग राज्यों में इसकी परंपराएं भले अलग हों, लेकिन इसका केंद्रीय संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत ही है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू हुई?

शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना के साथ शुरू हुई।

2. महाष्टमी 2026 किस तारीख को है?

उदया तिथि पर आधारित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महाष्टमी 19 अक्टूबर 2026 को मनाई जा सकती है। अपने क्षेत्र का पंचांग अवश्य देखें।

3. महानवमी 2026 कब मनाई जाएगी?

उदया तिथि के आधार पर महानवमी 20 अक्टूबर 2026 को पड़ सकती है। स्थानीय पंचांग और व्रत परंपरा के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

4. दशहरा 2026 की सही तारीख क्या है?

प्रकाशित कैलेंडरों में 20 और 21 अक्टूबर, दोनों तारीखें मिल रही हैं। अपने शहर के पंचांग से विजयादशमी और संबंधित अनुष्ठानों की तारीख की पुष्टि करें।

5. क्या अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन किया जा सकता है?

हां, कई परिवारों में कन्या पूजन अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है। सही दिन का चुनाव अपनी पारिवारिक परंपरा, व्रत के नियमों और स्थानीय पंचांग के अनुसार करें।


डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथियां और मुहूर्त प्रकाशित पंचांग-आधारित जानकारियों पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में सूर्योदय, तिथि-गणना और धार्मिक परंपराओं के कारण अंतर संभव है। धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से पुष्टि करें।