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बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्वामी विवेकानन्द जयंती के शुभ अवसर पर बिधीपुर आश्रम में प्रोग्राम आयोजन किया गया: अधिक जानकारी को पूरी खबर पढ़े



जालंधर(रोमेश): दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्वामी विवेकानन्द जयंती के शुभ अवसर पर अमृतसर बाईपास पर बिधीपुर आश्रम में एक प्रोग्राम आयोजन किया गया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी उपमा भारती, साध्वी शंकरप्रीता भारती जी, साध्वी त्रिनना भारती जी ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने युवाओं को क्रातिकारी विचार दिये 'उठो जागो और तब तक रूको नही जब तक अपनी मंजिल तक न पहुच जाओ। राष्ट्र चेतना के कीर्ति पुरूष युवा वर्ग के आदर्श योद्धा स्वामी विवेकानंद जी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। एक युवा संयासी के रूप में भारतीय संस्कृति की सुगंध विदेशों मे बिखेरने वाले
साहित्य दर्शन और इतिहास के प्राकंड विद्वान अपनी ओज पूर्ण वाणी से लोगों के दिल को छू लेने वाले स्वामी विवेकानंद जी नि:संदेह विश्व गुरू थे। स्वामी विवेकानंद जी ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना है, उनका मानना था कि नौजवान पीढ़ी अगर अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल देश की तरक्की में करें तो राष्ट्र को एक नए मुकाम तक पहुँचाया जा सकता है युवा ही वर्तमान का निर्माता एवं भविष्य का नियामक होता है। देश की युवा पीढ़ी पर उनकी विशेष आस्था थी, उन्होंने कहा था- तुम सबका जन्म ही इसीलिए हुआ है अपने में विश्वास रखो महान आत्म विश्वास से ही महान कार्य संपन्न होते है, निरंतर आगे बढ़ते रहो। विश्व में जितने भी महत्वपूर्ण
परिवर्तन हुए हैं उसमें सभी में युवाओं के लगन और बलिदान का अतुलनीय योगदान रहा है। शायद इसलिए कहा जाता है जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है। हमारी युवा शक्ति देश की तकदीर और तस्वीर बदलने का जज्बा रखती है। एक नया आइना दिखाने की क्षमता रखती है। अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन हमारी युवा शक्ति को अपनी सकारात्मक ऊर्जा राष्ट्र हित में लगाने को प्रेरित करता है। इसलिए आज युवाओं को संकल्प लेना होगा कि राष्ट्र के सन्मुखा आज जितनी भी चुनौतियाँ हैं हम उनका डटकर सामना करेंगें। युवा ऐसा पक्षी है जो टूटे हुए अंडे और बेबसी से स्वतंत्रता और आशा के खुले आसमान में पंख फै ला रहा है युवा खोज और सपनों के द्वारा अपने देश को समृद्धि प्रदान कर सकता है। इस अवसर पर स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन और शिक्षाओ से संबन्धित युवाओ को एक नाटक भी दिखाया गया, इस मौके पर स्वामी सजज्नानंद जी विशेष रूप से उपस्थित हुए ।








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