भगवान् श्री हनुमान जी के हवन और मंत्रों का पाठ नियमानुसार करने से सभी परेशानियां और भय दूर होते हैं। भगवान् श्री हनुमान जी अपने भक्तों की हमेशा सभी प्रकार के संकटों से रक्षा करते हैं। भगवान् श्री हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वे अमर हैं और इस धरती पर सूक्ष्म रूप में घूमते हैं। वह भगवान श्री राम के अनन्य भक्त और सेवक हैं। ऐसा माना जाता है कि जहां भी भगवान श्री राम का नाम जप सिमरण होता है, वहाँ भगवान् श्री हनुमान जी मोजूद रहते है।
आज हम भगवान् श्री हनुमान जी के सभी भक्तों को भगवान् श्री हनुमान जी के हवन की विधी के बारे में बताने जा रहे है। भगवान् श्री हनुमान जी के हवन विधि को, भगवान श्री हनुमान जी के एक सौ आठ नामों से किया जाता है। इस हवन से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और आसपास सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
हवन सामग्री
- हवन कुंड
- तिल
- सरहड
- अक्षत
- गुग्गल
- जौ
- शक्कर
- मेवा
- गुड़
- चंदन
- जावित्री लोंग
- दालचीनी
- अगरतगर
- जायफल
- ईलाइची
- आंवला
- कपूर
- इंद्र जौ
- गिलोय
- नांग केशर
- वालछड पटिलपन पवार बीज
- मुलहटी
- लाल चंदन
- अष्टगंध
- केसर
- मोचरस
- ब्राम्ही
- शंखपुष्पी
- पुष्कर मूल
- मजीठ
- धाम पुष्प
- खस
- गोकरू
- शतावर
- छरीला
- देवदारु
- शुद्ध गाय का घी
भगवान् श्री हनुमान जी का ध्यान करें मन्त्र का जाप करें
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
ॐ हनुमते नम: ध्यानार्थे पुष्पाणि सर्मपयामि।।
ॐ हनुमते नम:, पाद्यं समर्पयामि।।
अर्ध्यं समर्पयामि, आचमनीयं समर्पयामि।।
हवन विधि
भगवान् श्री हनुमान जी की पूजा करने की यह एक आसान विधि है। इस विधि से भगवान् श्री हनुमान जी के हवन करने के लिए, हवनकुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित करें। उसके बाद उपरोक्त सामग्री को शुद्ध घी में मिलाकर हनुमान जी के मंत्रो का उचारण करते हुए अग्निकुण्ड में आहुति दें।
हवन मन्त्र
- ॐ आञ्जनेयाय स्वाहा
- ॐ महावीराय स्वाहा
- ॐ हनुमते स्वाहा
- ॐ मारुतात्मजाय स्वाहा
- ॐ तत्वज्ञानप्रदाय स्वाहा
- ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय स्वाहा
- ॐ अशोकवनिकाक्षेप्त्रे स्वाहा
- ॐ सर्वमायाविभञ्ज्नाय स्वाहा
- ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे स्वाहा
- ॐ रक्षोविध्वंसकारका्य स्वाहा
- ॐ परविद्धापरीहराय स्वाहा
- ॐ परशौर्यविनाशाय स्वाहा
- ॐ परयन्त्रनिराकत्रे स्वाहा
- ॐ परयन्त्रप्रभेदका्य स्वाहा
- ॐ सर्वग्रहविनाशिने स्वाहा
- ॐ भीमसेनसहायकृते स्वाहा
- ॐ सर्वदुःखहराय स्वाहा
- ॐ सर्वलोकाचारिणे स्वाहा
- ॐ मनोजवाय स्वाहा
- ॐ पारिजातद्रुम-मूलवासाय स्वाहा
- ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते स्वाहा
- ॐ सर्वयन्त्रस्वरूपिणे स्वाहा
- ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय स्वाहा
- ॐ कपीश्वराय स्वाहा
- ॐ महाकायाय स्वाहा
- ॐ सर्वरोगहराय स्वाहा
- ૐ प्रभवे स्वाहा
- ॐ बल सिद्धिकराय स्वाहा
- ॐ सर्वविद्धा संवित्प्रदायका्य स्वाहा
- ॐ कपिसेेनानायका्य स्वाहा
- ॐ भविष्यच्चतुराननाय स्वाहा
- ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे स्वाहा
- ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते स्वाहा
- ॐ सच्चलद्वालसंत्रद्धरविमंडल-ग्रासोज्जवलाय स्वाहा
- ॐ गन्धर्व-विद्धातत्वज्ञानाय स्वाहा
- ॐ महाबल पराक्रमाय स्वाहा
- ॐ काराग्रह विमोक्त्रे स्वाहा
- ॐ श्रृंखला बन्धमोचकाय स्वाहा
- ॐ सागरोद्धारका्य स्वाहा
- ॐ प्राज्ञाय स्वाहा
- ॐ रामदूताय स्वाहा
- ॐ प्रजाभवते स्वाहा
- ॐ वानराय स्वाहा
- ॐ केशरिसुताय स्वाहा
- ॐ सीताशोकनिवारणाय स्वाहा
- ॐ अञ्ज्ना गर्भसम्भूताय स्वाहा
- ॐ बालार्कसद्रशाननाय स्वाहा
- ॐ विभीषणप्रियकराय स्वाहा
- ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय स्वाहा
- ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे स्वाहा
- ॐ वज्रकायाय स्वाहा
- ॐ महाद्धुत्ये स्वाहा
- ॐ चिरञ्जिविने स्वाहा
- ॐ रामभक्ताय स्वाहा
- ॐ दैत्यकार्य-व्याघातकाय स्वाहा
- ॐ यक्षहंत्रे स्वाहा
- ॐ काञ्चनाभाय स्वाहा
- ॐ पञ्चवक्त्राय स्वाहा
- ॐ महातपसे स्वाहा
- ॐ लंकिनीभञ्जनाय स्वाहा
- ॐ श्रीमते स्वाहा
- ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय स्वाहा
- ॐ गन्धमादनशैलहस्ताय स्वाहा
- ॐ लंकापुरविदाहकाय स्वाहा
- ॐ सुग्रीवसचिवाय स्वाहा
- ॐ धीराय स्वाहा
- ॐ शौर्याय स्वाहा
- ॐ दैत्यकुलान्तकाय स्वाहा
- ॐ सुरार्चिताय स्वाहा
- ॐ महातेजसे स्वाहा
- ॐ रामचूड़ामणिप्रदाय स्वाहा
- ॐ कामरुपिणे स्वाहा
- ॐ पिङ्गलाक्षाय स्वाहा
- ॐ वार्धिमैनाकपूजिताय स्वाहा
- ॐ कर्पूरीकृतमार्तण्डमण्डलाय स्वाहा
- ॐ विजितेन्द्रियाय स्वाहा
- ॐ रामसुग्रीवसन्धात्रे स्वाहा
- ॐ महारावणमर्द्दनाय स्वाहा
- ॐ स्फटिकभाय स्वाहा
- ॐ वागधीशायनमः स्वाहा
- ॐ नवव्याकृतिपण्डिताय स्वाहा
- ॐ चतुर्बाहवे स्वाहा
- ॐ दिनबन्धवे स्वाहा
- ॐ महात्मने स्वाहा
- ॐ भक्तवत्सलाय स्वाहा
- ॐ संजीवनगदाखड्गने स्वाहा
- ॐ शुचये स्वाहा
- ॐ वागिम्ने स्वाहा
- ॐ दृढव्रताय स्वाहा
- ॐ कालनेमिप्रमथनाय स्वाहा
- ॐ हरिमर्कटमर्कटाय स्वाहा
- ॐ ध्वान्तध्वंसिने स्वाहा
- ॐ शान्ताय स्वाहा
- ॐ प्रसन्नात्मने स्वाहा
- ॐ दशकण्ठमदसंह्रते स्वाहा
- ॐ योगिने स्वाहा
- ॐ रामगदालोलाय स्वाहा
- ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय स्वाहा
- ॐ वज्रदंष्ट्राय स्वाहा
- ॐ बज्रनखाय स्वाहा
- ॐ रूद्रवीर्यसमुभ्दवाय स्वाहा
- ॐ इन्द्रजीतप्रहारामोघ-ब्रह्मास्त्रनिवारकाय स्वाहा
- ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने स्वाहा
- ॐ शरपंजभेदकाय स्वाहा
- ॐ दशवाहवे स्वाहा
- ॐ लोकपूज्याय स्वाहा
- ॐ जाम्बवान-प्रीतिवर्द्धनाय स्वाहा
- ॐ सीतासहित-श्रीरामपाद-सेवा-धुरन्धराय स्वाहा
हवन के लाभ
- भगवान् श्री हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हवन एक सफल माध्यम है।
- भगवान् श्री हनुमान जी का हवन आसपास के वातावरण से नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करता है।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन से सभी दिशाओं में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन से उनके भक्तों पर उनकी कृपा दृष्टि बनी रहती है।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन से वह अपने भक्त की सभी परेशानियों को दूर करते हैं।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन से सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।
- भगवान् श्री हनुमान जी का हवन हमारे शरीर को स्वस्थ बनाता है।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन करने से जीवन पर आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन करने से घर में खुशहाली आती है।
- भगवान् श्री हनुमान जी के हवन करने से धन में वृद्धि होती है।
नोट: भगवान् श्री हनुमान जी के हवन से संबंधित विधि और मंत्रों के प्रकाशन में उचित ध्यान रखा गया है, फिर भी यदि कोई त्रुटि हुई हो हमसे, तो हम भगवान् श्री हनुमान जी के सभी भक्तों से क्षमा का अनुरोध करते हैं। अगर भगवान् श्री हनुमान जी का कोई भक्त हमें सुझाव देना चाहता हैं तो कमेंट बॉक्स में दे सकता है।
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