यदि गर्भवती महिला एचआईवी पॉजिटिव है, तो क्या अजन्मा बच्चा भी संक्रमित होगा?


एचआईवी का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं। इससे पीड़ित मरीजों से लोग दूरी बनाकर रखते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर गर्भवती महिला एचआईवी पॉजिटिव है तो उसके अजन्मे बच्चे का क्या होगा? स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस सवाल का जवाब है- नहीं। 
जन्म के बाद बच्चों के चार टेस्ट
एचआईवी संक्रमित मां से पैदा हुए बच्चे का इलाज 18 महीने तक किया जाता है। जन्म से लेकर डेढ़ महीने तक बच्चे को नेविरापीन सस्पेंशन दिया जाता है। इसके बाद 18 महीने तक सीपीटी की दवा दी जाती है। बच्चों का पहला टेस्ट डेढ़ महीने में किया जाता है और उसके बाद 6 महीने, 12 महीने और 18 के बाद टेस्ट किया जाता है। 18 महीने के बाद किया गया टेस्ट फाइनल होता है और पता चलता है कि बच्चा एचआईवी पॉजिटिव है या नेगेटिव।
लक्षण दिखने पर तुरंत जाएं अस्पताल 
अगर किसी को एचआईवी के लक्षण दिखाई दें तो वह तुरंत अस्पताल जाकर चेकअप कराएं, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके। एचआईवी कोई छूत की बीमारी नहीं है। इससे बचाव के लिए एहतियात बरतने की जरूरत है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

job

💼 नवीनतम जॉब पोस्ट

Current Affairs

📰 करंट अफेयर्स से जुड़ी ताज़ा पोस्ट