आज हम आपके लिए लेकर आए हैं गिलोय का काढ़ा पीने के जबरदस्त फायदे। कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं, ऐसे में गिलोय का काढ़ा एक बेहतर विकल्प हो सकता है। भारत में ठंड ने दस्तक दे दी है। ऐसे में हमें कई तरह के मौसमी रोग हो सकते हैं। इसमें सर्दी, फ्लू, बुखार आदि शामिल हैं। अगर आप इन बीमारियों से पीड़ित हैं तो गिलोय का काढ़ा पिएं। आयुर्वेद में इसे बहुत कारगर औषधि माना जाता है।
गिलोय का काढ़ा समग्री
गिलोय- 1 फुट लंबा तना
नीम के पत्ते- 5 से 6
तुलसी के पत्ते- 10 से 12 पत्ते
काला गुड़- 20 ग्राम
गिलोय का काढ़ा बनाने की विधि
सबसे पहले गिलोय के टुकड़ों को एक पैन में डालें और उसमें 4 कप पानी डाल दें। इसके बाद इसे धीमी आंच पर 20 मिनट तक पकाएं। फिर इसमें नीम के पत्ते, तुलसी के पत्ते और काला गुड़ मिलाएं। फिर इसे 2 कप रह जाने तक पकाएं। इसके बाद इसे छानकर रोगी को दें। सर्दी, खांसी, बुखार आदि समस्याओं से आपको जल्द ही राहत मिलेगी।
सेहत के लिए क्यों खास है गिलोय का काढ़ा?
आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है, यह बहुत ही सस्ती आयुर्वेदिक दवा है। गिलोय को गुडूची या अमृता के नाम से भी जाना जाता है। डेंगू, चिकनगुनिया, बुखार जैसे गंभीर रोगों में गिलोय का रस और काढ़ा दिया जाता है। बदलते मौसम में गिलोय कई तरह के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी बचाता है। अगर आप सर्दी के मौसम में इसका सेवन करते हैं तो आपको सर्दी, खांसी, बुखार आदि समस्याओं से राहत मिलती है।
काढ़ा कितना पीना चाहिए
गिलोय का काढ़ा रोजाना एक कप से ज्यादा नहीं पीना चाहिए। एक कप से ज्यादा काढ़ा पीने से भी आपको नुकसान हो सकता है। अगर आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका सेवन करें।
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