भारतीय कंप्यूटर आपातकाल प्रतिक्रिया बल यानी सीई आरटी इन यह एक केंद्रक अभिकरण है। जिसका कार्य हैकिंग और फिशिंग जैसे साइबर सुरक्षा खतरों से निपटना है। यह इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत संचालित होता है। केंद्र ने सीईआरटीइन को पारदर्शिता कानून के दायरे से छूट देने के लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 242 के तहत दी गई अपनी शक्तियों का उपयोग किया। आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 242 केंद्र सरकार को सरकार द्वारा स्थापित आसूचना अथवा सुरक्षा संगठनों को शामिल कर अथवा हटाकर अनुसूची में परिवर्तन करने की अनुमति देती है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने दूसरी पीढ़ी का आपदा चेतावनी प्रेछित्र विकसित किया है। जो समुद्र में मछुआरों के लिए मछली पकड़ने की नौकाओं से आपातकालीन संदेश भेजने के लिए एक स्वदेशी तकनीकी समाधान है। इसरो द्वारा डीटी एसजी का विकास किया गया है। जो कि नाविक यानी भारतीय नक्षत्र में नौवहन रिसीवर मॉड्यूल पर आधारित एक अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी यानी यूएचएफ प्रेषित या ट्रांसमीटर है। यह नाविक रिसीवर मॉड्यूल स्थिति निर्धारण के साथ साथ प्रसारण संदेश पुष्टि का समर्थन करता है। जिसे नाविक मैसेजिंग सेवा कहा जाता है।
भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के बारे में संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा उड्डयन बाजार है। अनियंत्रित यात्रियों को विमान नियम 1937 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत नियंत्रित किया जाता था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए प्रमुख नियामक संस्था है। जो मुख्य रूप से भारत में नागरिक उड्डयन को नियंत्रित करती है। यह सुरक्षा मुद्दों से निपटने, हवाई परिवहन सेवाओं के विनियमन नागरिक हवाई नियमों और विनियमों को लागू करने तथा ऐसे अन्य कार्यों के लिए जिम्मेदार है।
युगांडा अल्प विकसित देशों के लिए भारत की शुल्क मुक्त प्रशुल्क वरीयता योजना का लाभार्थी रहा है। युगांडा को भारतीय निर्यात की प्रमुख वस्तुओं में भेष जीय उत्पाद, वाहन, प्लास्टिक, कागज व पेपर बोर्ड, कार्बनिक रसायन इत्यादि शामिल है। युगांडा से भारत में आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में सब्जियां तथा कुछ जड़े व कंद, कॉफी, चाय एवं मसाले और कोको व कोको उत्पादन हेतु विधि शामिल है। भारत तथा युगांडा के बीच दोहरा कराधान परिहार समझौता वर्ष 2004 से प्रभावी है।
मंदिर वास्तुकला की नागज शैली पांचवीं शताब्दी के आसपास उत्तरी भारत में गुप्त काल के अंत में मंदिर वास्तुकला की नागर शैली का उदय हुआ। इसकी तुलना द्रविड शैली से की जाती है जिसकी उत्पत्ति भी उसी समय दक्षिणी भारत में हुई थी। नागर शैली में निर्मित मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बनाए जाते हैं। जिसमें गर्भ गृह देवता की प्रतिमा का विश्राम स्थल मौजूद होता है। जो मंदिर का सबसे पवित्रतम स्थल होता है। एक विशिष्ट नागर शैली के मंदिर में गर्भगृह के चारों ओर एक प्रदक्षिणा पथ तथा उसके समान धूरी पर एक अथवा अधिक मंडप या हॉल भी शामिल होते हैं। साथ ही इसकी दीवारों पर विस्तृत भित्ति चित्र तथा नकाशी इसकी विशेषता है।
एमपी ईएम बीए प्रभाव ने अपने आश्चर्यजनक अवलोकन से वैज्ञानिकों की रुचि बढ़ा दी है। कि गर्म पानी समान परिस्थितियां होने पर ठंडे पानी की तुलना में तेजी से जम सकता है। शोधकर्ताओं ने घटना के कारणों को निर्धारित करने के लिए कई प्रयोग किए हैं। लेकिन आम सहमति के निष्कर्ष की अभी भी कमी है। संभावित कारणों में सूक्ष्म बुलबुले वाष्पीकरण ठंडे पानी में पाले की उपस्थिति और उबलने से उत्पन्न यौगिकों का प्रभाव शामिल है। उबालकर गर्म किए गए पानी में सूक्ष्म बुलबुले रह जाते हैं। यह संवहन को बढ़ावा देते हैं और पानी ठंडा होने पर तेजी से गर्मी को स्थानांतरित करते हैं।
प्रोजेक्ट आरोग्य मैत्री का भीष्म यानी भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग हित एंड मैत्री क्यूब अयोध्या में स्थित एक अत्याधुनिक स्वदेशी मोबाइल अस्पताल उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन के दौरान एक चकित्सा आपातकाल के स्थिति में एक जीवन रक्षक के रूप में उभर कर आया। आरोग्य मैत्री परियोजना में भारत प्राकृतिक आपदाओं या मानवी संकटों के प्रभाव का सामना करने वाले किसी भी विकासशील देश को महत्त्वपूर्ण चिकित्सा संसाधनों की आपूर्ति करना शामिल है। भीष्म क्यूब को त्वरित प्रतिक्रिया और समग्र देखभाल पर बल देते हुए 200 हताहतों तक के उपचार के लिए तैयार किया गया है। यह एड क्यूब आपात स्थितियों के दौरान आपदा प्रतिक्रिया और चिकित्सा सहायता वृद्धि करने हेतु निर्मित कई नवोन्मेष उपकरणों से युक्त है। यह क्षेत्र में चिकित्सा सेवाओं के प्रभावी समन्वय वास्तविक समय की निगरानी करता है। साथ ही कुशल प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए कृतिम बुद्धिमता तथा डेटा एनालिटिक्स को एकीकृत करता है। भीष्म क्यूब की सफलता आपात स्थिति के दौरान तत्काल और प्रभावित चिकित्सा सहायता प्रदान करने में मोबाइल अस्पताल इकाइयों के महत्व को रेखांकित करती है।
वैज्ञानिकों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के अटलांटिक तट पर स्थित सबसे बड़े ज्ञात गहरे समुद्र की मूंगा चट्टान का मानचित्रण किया है। यह चट्टान लगभग 500 किमी लंबी है जो फ्लोरिडा से दक्षिण कैरोलिना तक फैली हुई है। इसकी चौड़ाई 110 किमी तक पहुंच जाती है। रीफ का क्षेत्रफल येलो स्टोन नेशनल पार्क से लगभग तीन गुना बड़ा है। हाल ही में पाई गई मुंगा चट्टान के विपरीत जो गहरे जल में सबसे बड़ी है, ग्रेट बैरियर रीफ उथले जल में सबसे बड़ी मुंगा चट्टान प्रणाली है।
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन यानी एनएमपी चार वर्ष की अवधि यानी वित्त वर्ष 2022 से 25 में सड़कों रेलवे, बिजली, तेल और गैस पाइपलाइन, दूरसंचार नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्रों में केंद्र सरकार की मुख्य आस्ती को पट्टे पर देकर 6 लाख करोड़ रपए की कुल मुद्रीकरण क्षमता की परिकल्पना करता है। एनएमपी के माध्यम से मुद्रीकरण में गैर प्रमुख आस्ती के विनिवेश के माध्यम से मुद्रीकरण को छोड़कर केवल मुख्य आस्ती शामिल है। वर्तमान में अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में केवल केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों और सीपीएस ए की आस्ती को शामिल किया गया है। इस पाइपलाइन का उद्देश्य राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के तहत वित्त वर्ष 2015 तक 6 वर्षों में 111 ट्रिलियन रुपए के निवेश का समर्थन करना है। एनएमपी के लिए समय सीमा को रणनीतिक रूप से राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के तहत शेष अवधि में समाप्त करने के लिए निर्धारित किया गया है।
होमी जहांगीर भाबा एक अग्रणी भारतीय भौतिक विज्ञानी थे। उन्हें भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है। भारत का तीन चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम 1950 के दशक में होमी भाबा द्वारा तैयार किया गया था। उन्होंने दो संस्थानों की स्थापना और निर्देशन किया जो भारत को परमाणु युग में लाएंगे। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च यानी टी आईएफआर तथा परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान ट्रॉम्बे, बाद में उनके सम्मान में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र यानी बीएआरसी का नाम बदल दिया गया। भाबा वर्ष 1942 में एडम्स पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय थे, जो कैंब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान था। बाबा को उनके प्राथमिक कड़ों और उनकी अंतः क्रियाओं के सिद्धांत के लिए पुरस्कार मिला, उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया।
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