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क्या जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा लौटेगा? अब्दुल्लाह सरकार ने पेश किया प्रस्ताव

article 370

जम्मू-कश्मीर की विधानसभा ने बीते दिन मंगलवार को राज्य का विशेष दर्जा बहाल करने का एक अहम प्रस्ताव पारित किया है। यह प्रस्ताव नेशनल कांफ्रेंस(NC) के नेता और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने पेश किया, जिसे पार्टी के अन्य विधायकों ने भी समर्थन किया। हालांकि, भाजपा के विधायकों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। दिलचस्प बात यह है कि इस प्रस्ताव में सीधे तौर पर अनुच्छेद 370 का कोई जिक्र नहीं किया गया है।
आपको याद दिला दें कि 2019 में भारतीय सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में 6 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कांफ्रेंस को जीत मिली और सरकार बनाई।
हालांकि, हाल के दिनों में पीडीपी(पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी) ने विधानसभा में अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे लेकर काफी हंगामा हुआ था। वहीं, चुनाव प्रचार के दौरान नेशनल कांफ्रेंस ने भी यह वादा किया था कि वह अनुच्छेद 370 को बहाल करने के लिए काम करेगी, लेकिन इस नए प्रस्ताव में इसका उल्लेख नहीं किया गया।
इस प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर की विधानसभा ने राज्य के विशेष दर्जे और संवैधानिक गारंटियों को फिर से बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन गारंटियों से जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा होती है। विधानसभा ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि वह राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू करे और जम्मू-कश्मीर के लिए एक संवैधानिक रास्ता निकाले ताकि वहां की जनता के अधिकार सुरक्षित रह सकें।
यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर एक अहम मोड़ पर खड़ा है, और आने वाले समय में इससे जुड़े कई राजनीतिक और कानूनी सवाल भी उठ सकते हैं।