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शनिवार, 26 सितंबर 2026

Duplicate Aadhaar पर लगेगी लगाम? Bharat ABIS ऐसे खोजेगा डुप्लीकेट ID, जानिए कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी

Aadhaar

Aadhaar देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणालियों में से एक है। इतने बड़े स्तर पर करोड़ों-अरबों पहचान रिकॉर्ड को संभालना अपने आप में बड़ी तकनीकी चुनौती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए UIDAI से जुड़े शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों की टीम ने Bharat ABIS नाम का एक open-source, multi-modal biometric search system विकसित किया है।

इस सिस्टम का मकसद सिर्फ किसी व्यक्ति की पहचान सत्यापित करना नहीं, बल्कि बड़े biometric database में यह पता लगाना भी है कि कहीं उसी व्यक्ति की एक से ज्यादा पहचान तो मौजूद नहीं है। इसे biometric deduplication कहा जाता है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। Bharat ABIS को अभी पूरे Aadhaar सिस्टम में लागू कर दिया गया है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध शोध में इसके बड़े स्तर पर परीक्षण के परिणाम सामने आए हैं, लेकिन researchers ने भी बड़े पैमाने पर वास्तविक deployment के लिए आगे testing की जरूरत बताई है।


क्या है Bharat ABIS?

ABIS का पूरा नाम Automated Biometric Identification System है। Bharat ABIS को multi-modal biometric search के लिए तैयार किया गया है। इसमें व्यक्ति के fingerprint, face और iris जैसे biometric features को processing के बाद एक combined template में इस्तेमाल किया जाता है।

शोध के अनुसार, इन biometric modalities को मिलाकर लगभग 13.5 KB का combined template तैयार किया जाता है। इसके बाद सिस्टम किसी नए biometric record को बड़े database में मौजूद records से match करके संभावित duplicate पहचान खोजने की कोशिश करता है।


Duplicate Aadhaar को कैसे खोज सकता है Bharat ABIS?

मान लीजिए किसी व्यक्ति की पहचान पहले से database में मौजूद है और किसी कारण से उसी व्यक्ति के नाम से दूसरी identity बनाने का प्रयास होता है।

ऐसी स्थिति में Bharat ABIS biometric information को database में मौजूद records के साथ compare कर सकता है।

इसमें मुख्य रूप से:

  • Fingerprint

  • Face

  • Iris

जैसी अलग-अलग biometric जानकारी को process किया जाता है।

इसके बाद system 1:N search करता है। यानी एक व्यक्ति के biometric input को database में मौजूद बड़ी संख्या में identities के साथ compare किया जाता है। इसका उद्देश्य संभावित duplicate records को सामने लाना है।


220 मिलियन Aadhaar records पर हुआ परीक्षण

Bharat ABIS की खासियत समझने के लिए इसका scale सबसे महत्वपूर्ण है।

शोधकर्ताओं ने Aadhaar database के लगभग 1.55 billion records में से randomly selected 220 million identities वाले एक de-identified gallery पर सिस्टम का evaluation किया। यानी परीक्षण के लिए इस्तेमाल किए गए data को पहचान योग्य रूप में सार्वजनिक नहीं किया गया था।

शोध में adult records के लिए Bharat ABIS ने 0.5% FPIR पर 0.3% FNIR हासिल किया।

सरल भाषा में समझें तो FPIR उस स्थिति को दर्शाता है जब सिस्टम किसी record को गलत तरीके से potential match/duplicate के रूप में पहचान लेता है, जबकि FNIR ऐसी स्थिति से संबंधित है जिसमें मौजूद match को सिस्टम पकड़ नहीं पाता।


20 मिलियन records पर accuracy और भी बेहतर

Research में 20 million-record gallery पर भी Bharat ABIS को commercial biometric systems के साथ compare किया गया।

इस evaluation में researchers ने 0.1% FPIR और 0.05% FNIR जैसे परिणाम report किए। Research paper में इसकी तुलना Aadhaar ecosystem में इस्तेमाल होने वाले तीन commercial off-the-shelf ABIS systems से भी की गई और researchers ने Bharat ABIS की performance को comparable या बेहतर बताया।

यहां यह समझना जरूरी है कि ये research evaluation के परिणाम हैं, न कि इस बात का प्रमाण कि Bharat ABIS को पूरे Aadhaar ecosystem में operational replacement के तौर पर लागू कर दिया गया है।


एक server पर 100 searches प्रति सेकंड

Bharat ABIS की scalability भी research का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शोध के अनुसार, एक server पर 40 million-record gallery के साथ system ने लगभग 100 searches प्रति सेकंड की throughput हासिल की। इस test setup में 8 Nvidia H100 GPUs और 2TB RAM का इस्तेमाल किया गया था।

इतने बड़े biometric database में search करना सामान्य database search से कहीं अधिक जटिल काम है। इसलिए system में search workload को अलग-अलग servers पर distribute करने के लिए scheduler architecture भी इस्तेमाल किया गया है।


क्या Bharat ABIS Aadhaar में मौजूदा सिस्टम को replace करेगा?

फिलहाल ऐसा दावा करना सही नहीं होगा।

UIDAI पहले से Aadhaar enrolment के दौरान demographic और biometric deduplication की प्रक्रिया इस्तेमाल करता है। UIDAI की आधिकारिक जानकारी के अनुसार biometric deduplication में तीन अलग-अलग vendors के ABIS systems का उपयोग किया गया है ताकि duplicate enrolment को पहचानने की accuracy और performance बेहतर रखी जा सके।

UIDAI की 2022-23 annual report में यह भी बताया गया था कि नए ABIS ecosystem में fingerprint और iris के साथ face modality को भी शामिल किया गया और system को बड़े biometric gallery पर deduplication के लिए तैयार किया गया।

वहीं UIDAI की 2024-25 annual report में अपने indigenous, AI/ML-powered ABIS की दिशा में काम करने की जानकारी दी गई है, जिसे भविष्य में 2 billion records की gallery संभालने के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है।


Bharat ABIS क्यों महत्वपूर्ण है?

Bharat ABIS की सबसे बड़ी खासियत इसका open-source architecture है। Researchers के मुताबिक ऐसी technology उन देशों के लिए भी उपयोगी हो सकती है जहां commercial biometric systems को खरीदना या maintain करना महंगा पड़ सकता है।

भारत के लिए भी इसका महत्व इसलिए है क्योंकि Aadhaar जैसे विशाल identity ecosystem में biometric deduplication को तेज, scalable और accurate बनाना लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

हालांकि, किसी भी biometric technology में false matches और missed matches की संभावना को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है। इसलिए बड़े पैमाने पर deployment से पहले accuracy, privacy, security और operational reliability जैसे पहलुओं का व्यापक परीक्षण जरूरी रहेगा।


क्या अब Duplicate Aadhaar पूरी तरह खत्म हो जाएगा?

नहीं, अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।

Bharat ABIS के research results जरूर बताते हैं कि open-source multi-modal biometric technology बड़े identity databases में deduplication के लिए काफी क्षमता रखती है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भारत में duplicate Aadhaar की समस्या अब पूरी तरह खत्म हो गई है।

असल बदलाव तब माना जाएगा जब ऐसी technology को व्यापक operational environment में लागू करके उसके वास्तविक परिणाम सामने आएंगे।


Bharat ABIS फिलहाल एक महत्वपूर्ण research-based development है, न कि Aadhaar के लिए घोषित nationwide replacement system। इसका fingerprint, face और iris को एक साथ इस्तेमाल करके बड़े biometric database में duplicate identities खोजने का तरीका इसे खास बनाता है।

220 million Aadhaar-derived identities के evaluation और 40 million-record gallery पर reported search performance ने इसकी scalability की क्षमता जरूर दिखाई है। लेकिन nationwide implementation को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आगे के testing और official deployment information का इंतजार करना जरूरी है।

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