नई दिल्ली: भारत में नई कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में सेफ्टी रेटिंग और भी महत्वपूर्ण होने वाली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि Bharat NCAP 2.0 को अक्टूबर 2027 से लागू करने की तैयारी है। नए चरण में सिर्फ क्रैश के दौरान कार कितनी सुरक्षा देती है, यही नहीं देखा जाएगा, बल्कि हादसा रोकने की क्षमता, पैदल यात्रियों और दूसरे सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा तथा दुर्घटना के बाद बचाव जैसे पहलुओं को भी ज्यादा महत्व मिलेगा।
मौजूदा Bharat NCAP की तुलना में नया सिस्टम ज्यादा व्यापक होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में कार की सुरक्षा को 100 अंकों के आधार पर पांच प्रमुख क्षेत्रों में आंका जाएगा। इसका उद्देश्य वाहन सुरक्षा को केवल क्रैश टेस्ट तक सीमित रखने के बजाय सड़क हादसे से पहले, हादसे के दौरान और उसके बाद की पूरी सुरक्षा व्यवस्था को मूल्यांकन में शामिल करना है।
Bharat NCAP 2.0 में 100 अंकों का नया सिस्टम
प्रस्तावित Bharat NCAP 2.0 में 100 अंकों को पांच सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया है:
Crash Protection – 55 अंक
Vulnerable Road User Protection – 20 अंक
Safe Driving – 10 अंक
Accident Avoidance – 10 अंक
Post-Crash Safety – 5 अंक
इस बदलाव का सीधा मतलब यह है कि भविष्य में किसी कार की सुरक्षा रेटिंग केवल यह देखकर तय नहीं होगी कि क्रैश के समय उसके यात्रियों को कितनी सुरक्षा मिली। पैदल यात्री, दोपहिया वाहन सवार और दुर्घटना से बचने में मदद करने वाली तकनीक भी रेटिंग को प्रभावित करेगी।
5-स्टार सेफ्टी रेटिंग हासिल करना होगा मुश्किल
Bharat NCAP 2.0 में सबसे बड़ी बात 5-स्टार रेटिंग के मानकों में संभावित बदलाव है। उपलब्ध प्रस्ताव के मुताबिक, 2027 से 2029 के बीच 5-स्टार पाने के लिए कार को कम से कम 70/100 अंक हासिल करने होंगे। इसके बाद 2029 से 2031 के बीच यह सीमा 80 अंक तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा किसी वाहन को 5-स्टार रेटिंग के लिए पांचों सुरक्षा क्षेत्रों में पूरी तरह कमजोर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं होगी। यानी किसी एक प्रमुख सुरक्षा क्षेत्र में शून्य स्कोर होने पर वाहन 5-स्टार रेटिंग के लिए योग्य नहीं होगा।
अब ज्यादा महत्वपूर्ण होंगी ADAS और एक्टिव सेफ्टी तकनीकें
नए प्रोटोकॉल में Active Safety और ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) को ज्यादा महत्व मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित मूल्यांकन में Autonomous Emergency Braking यानी AEB, Lane Departure Warning और Forward Collision Warning जैसी तकनीकों का प्रदर्शन वाहन के स्कोर को प्रभावित कर सकता है।
इसका फायदा यह होगा कि कार की सुरक्षा को सिर्फ दुर्घटना होने के बाद यात्रियों को बचाने के नजरिए से नहीं देखा जाएगा, बल्कि दुर्घटना को पहले ही टालने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
ESC और Curtain Airbags पर भी बढ़ेगा फोकस
प्रस्तावित Bharat NCAP 2.0 framework में Electronic Stability Control (ESC) और curtain airbags को सुरक्षा मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण बनाया गया है। इसका संकेत यह है कि आने वाले वर्षों में कार कंपनियों के लिए केवल बेसिक सेफ्टी फीचर्स देना पर्याप्त नहीं होगा; बेहतर सुरक्षा पैकेज विकसित करना ज्यादा जरूरी हो जाएगा।
साथ ही, side-facing seats वाली गाड़ियों के Bharat NCAP rating के लिए पात्र न होने का भी प्रस्ताव सामने आया है।
क्रैश टेस्ट भी होंगे ज्यादा व्यापक
मौजूदा व्यवस्था की तुलना में नए प्रस्ताव में क्रैश प्रोटेक्शन के तहत टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों जैसे Vulnerable Road Users की सुरक्षा को अलग से महत्व दिया जाएगा।
यानी आने वाले समय में कार की मजबूती के साथ यह भी देखा जाएगा कि दुर्घटना की स्थिति में वाहन के आसपास मौजूद दूसरे सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए उसका प्रभाव कितना गंभीर हो सकता है।
कार खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?
Bharat NCAP 2.0 का सबसे बड़ा असर आम कार खरीदार पर पड़ सकता है। भविष्य में सिर्फ यह देखना कि किसी कार को कितने स्टार मिले हैं, पर्याप्त नहीं होगा। ग्राहक यह भी देख सकेंगे कि कार ने Crash Protection, Accident Avoidance, Pedestrian Protection और Post-Crash Safety जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में कैसा प्रदर्शन किया है।
इससे कंपनियों पर भी बेहतर सेफ्टी टेक्नोलॉजी और मजबूत वाहन संरचना विकसित करने का दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय में इसका उद्देश्य भारतीय सड़कों पर वाहन सुरक्षा के स्तर को बेहतर करना और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली गंभीर चोटों तथा मौतों को कम करने में मदद करना है।
Bharat NCAP से भारत की कार इंडस्ट्री को भी फायदा
Bharat NCAP की शुरुआत अक्टूबर 2023 में हुई थी। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इस कार्यक्रम ने भारत में वाहन सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई है और भारतीय वाहनों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में छवि को मजबूत करने में भी मदद मिली है।
सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर वाहन टेस्टिंग की लागत Global NCAP की तुलना में काफी कम है। इससे भारतीय वाहन निर्माताओं के लिए सुरक्षा परीक्षण को अधिक सुलभ बनाने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
Bharat NCAP 2.0 भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में सुरक्षा के नजरिए से एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। अक्टूबर 2027 से प्रस्तावित नई व्यवस्था में कार की सुरक्षा को ज्यादा व्यापक तरीके से जांचने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
हालांकि, नए नियमों के अंतिम रूप और लागू होने से पहले सरकारी अधिसूचनाओं में बदलाव संभव हैं। इसलिए वाहन खरीदारों और ऑटो इंडस्ट्री के लिए अंतिम नियमों को Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) की आधिकारिक अधिसूचना के आधार पर देखना सबसे सही रहेगा।
नोट: ऊपर दिए गए 100-पॉइंट स्ट्रक्चर, स्टार-रेटिंग thresholds और कुछ तकनीकी प्रावधान प्रस्तावित Bharat NCAP 2.0 framework पर आधारित हैं; इन्हें अंतिम नियम मानने से पहले संबंधित सरकारी notification देखना जरूरी है।


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