जालंधर, 30 सितंबर: जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी आबादी गणना को लेकर जालंधर जिले में फील्ड ट्रेनरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। स्थानीय लायलपुर खालसा कॉलेज में आयोजित इस प्रशिक्षण के दौरान फील्ड ट्रेनरों को जनगणना की प्रक्रिया, डिजिटल तकनीक और डेटा संग्रह से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) अमनिंदर कौर बराड़ ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने फील्ड ट्रेनरों को उनकी जिम्मेदारी गंभीरता, पारदर्शिता और पूरी निष्ठा के साथ निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जनगणना देश की योजनाबद्ध विकास प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसमें एकत्र होने वाली जानकारी की सटीकता और विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले फील्ड ट्रेनरों को नियुक्ति प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
डिजिटल माध्यम से डेटा दर्ज करने की दी गई ट्रेनिंग
तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनरों ने फील्ड ट्रेनरों को जनगणना की पूरी प्रक्रिया के साथ-साथ डिजिटल एप्लिकेशन के इस्तेमाल की जानकारी दी। विशेष रूप से डिजिटल माध्यम से डेटा एकत्र करने और उसे निर्धारित तरीके से दर्ज करने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के बाद फील्ड ट्रेनर अपने-अपने क्षेत्रों में गणनाकर्मियों और सुपरवाइजरों को 5 अक्टूबर से 10 नवंबर 2026 तक प्रशिक्षण देंगे। यही गणनाकर्मी और सुपरवाइजर जनगणना-2027 के दूसरे चरण के दौरान घर-घर जाकर परिवारों और उनके सदस्यों से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे।
इस दौरान निर्धारित 40 प्रश्नों के आधार पर जानकारी जुटाई जाएगी और आबादी गणना की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। एकत्रित जानकारी को पीई (Population Enumeration) ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे डेटा संग्रह और रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
नवंबर से शुरू होगा स्वयं गणना का चरण
जनगणना-2027 के दूसरे चरण के तहत स्वयं गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक आबादी गणना का कार्य किया जाएगा।
आबादी गणना पूरी होने के बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 तक रिविजनल राउंड आयोजित किया जाएगा। इस दौरान आवश्यक संशोधन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
जनगणना-2027 की पूरी प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से डेटा संग्रह को अधिक व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।


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