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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026

Dhanteras 2026 Date: धनतेरस 6 या 7 नवंबर को? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी खरीदने का समय और पूजा विधि

Dhanteras 2026

Dhanteras 2026 Date and Shubh Muhurat: धनतेरस का त्योहार हिंदू धर्म में धन, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना भी शुभ माना जाता है। साल 2026 में धनतेरस की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि यह पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा या 7 नवंबर को। आइए जानते हैं धनतेरस 2026 की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि, खरीदारी का समय और धार्मिक महत्व।


धनतेरस 2026 में कब है? (Dhanteras 2026 Date)

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में धनतेरस का त्योहार शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। द्रिक पंचांग की गणना के मुताबिक, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह लगभग 10:47 बजे समाप्त होगी।

त्रयोदशी तिथि अगले दिन तक रहने के कारण कुछ लोगों के मन में तारीख को लेकर भ्रम हो सकता है। हालांकि, धनतेरस की पूजा के लिए शाम के प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी आधार पर 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी।


Dhanteras 2026 Shubh Muhurat: धनतेरस पूजा का शुभ समय

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा का समय स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त सहित स्थानीय पंचांग की गणना के अनुसार बदल सकता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली के लिए धनतेरस पूजा का मुहूर्त इस प्रकार है:

  • धनतेरस की तारीख: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: सुबह 10:30 बजे

  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे

  • प्रदोष काल: शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक

  • धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक

ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। दूसरे शहरों में पूजा के मुहूर्त में अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा शुरू करने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें।


धनतेरस 2026 पर सोना-चांदी कब खरीदें?

धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। हालांकि, खरीदारी का कोई एक समय सभी शहरों और सभी वस्तुओं के लिए समान नहीं होता।

धनतेरस पर खरीदारी की योजना बनाते समय इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:

1. सोना और चांदी: आभूषण, सिक्के या चांदी की वस्तुएं खरीदने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ समय की जानकारी लें।

2. बर्तन: इस दिन पीतल, तांबे और स्टील के बर्तन खरीदने की परंपरा है। आप अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।

3. इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान: कई परिवार धनतेरस पर मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और अन्य घरेलू उपकरण भी खरीदते हैं। ऐसे सामान खरीदते समय कीमत, वारंटी, रिटर्न पॉलिसी और बिल की जांच करना जरूरी है।

4. वाहन और अन्य बड़ी खरीदारी: यदि आप कार, बाइक या कोई महंगी वस्तु खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो शुभ समय के साथ अपने बजट और भुगतान की शर्तों पर भी ध्यान दें।

सोना-चांदी खरीदना धार्मिक परंपरा और व्यक्तिगत पसंद का विषय है। इसकी कीमतें बाजार के अनुसार बदलती रहती हैं, इसलिए खरीदारी से पहले ताजा भाव और मेकिंग चार्ज की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।


धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दिन भक्त अच्छे स्वास्थ्य, सुख और परिवार के कल्याण की कामना करते हुए भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। कुछ परंपराओं में इस अवसर पर आयुर्वेद, चिकित्सा और स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुओं के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया जाता है।


धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का महत्व

धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। हिंदू मान्यताओं में माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना गया है, जबकि भगवान कुबेर को धन का संरक्षक कहा जाता है।

भक्त इस दिन घर की साफ-सफाई करते हैं, पूजा स्थल को सजाते हैं और दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से घर में शुभता आती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि पूजा से जुड़े फल धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें निश्चित आर्थिक लाभ या भविष्य की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए।


Dhanteras Puja Vidhi: धनतेरस की पूजा कैसे करें?

धनतेरस के दिन घर पर सामान्य रूप से इस प्रकार पूजा की जा सकती है। परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति के अनुसार विधि में अंतर संभव है।

  1. घर और पूजा स्थल की सफाई करें: पूजा से पहले घर को साफ करें और पूजा स्थल को व्यवस्थित करें।

  2. पूजा सामग्री तैयार रखें: दीपक, रूई की बाती, घी या तेल, फूल, रोली, अक्षत, फल और मिठाई जैसी आवश्यक सामग्री रखें।

  3. भगवान धन्वंतरि का स्मरण करें: श्रद्धापूर्वक भगवान धन्वंतरि की पूजा करें और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

  4. माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें: अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।

  5. दीपक जलाएं: शाम के समय घर और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। यमदीपदान की परंपरा निभाने वाले परिवार अपनी रीति के अनुसार इसे कर सकते हैं।

  6. आरती और प्रार्थना करें: पूजा के अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

पूजा में सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, स्वच्छता और अपनी पारिवारिक परंपराओं का पालन करना है।


धनतेरस 2026: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. धनतेरस 2026 में किस तारीख को है?

धनतेरस 2026 में शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी।

2. क्या धनतेरस 7 नवंबर 2026 को भी है?

त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर की सुबह तक रहेगी, लेकिन प्रदोष काल में त्रयोदशी होने के आधार पर धनतेरस का मुख्य पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा।

3. धनतेरस 2026 में पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में पूजा का समय शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक है। दूसरे शहरों के लिए समय अलग हो सकता है।

4. धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?

धार्मिक परंपरा के अनुसार, सोना, चांदी, बर्तन और जरूरत की नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। खरीदारी अपनी आर्थिक क्षमता और जरूरत के अनुसार करनी चाहिए।

5. धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?

इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। कुछ परिवारों में यमदीपदान भी किया जाता है।


निष्कर्ष

धनतेरस 2026 का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर की सुबह तक रहने के बावजूद शाम के प्रदोष काल के आधार पर 6 नवंबर को पूजा करना निर्धारित है। नई दिल्ली के लिए पूजा का शुभ समय शाम 6:02 बजे से रात 7:57 बजे तक है। चूंकि अलग-अलग शहरों में मुहूर्त बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। धनतेरस पर पूजा, दीपदान और खरीदारी करते समय अपनी पारिवारिक परंपराओं, जरूरतों और बजट का ध्यान रखें।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई पूजा तिथि और मुहूर्त की जानकारी पंचांग-आधारित गणनाओं तथा धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग स्थानों और पंचांगों में समय का अंतर संभव है। पूजा के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से पुष्टि करें। सोना-चांदी और अन्य वस्तुओं की खरीदारी से पहले बाजार भाव और संबंधित शर्तों की जांच करें।

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