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शुक्रवार, 17 सितंबर 2021

भारतीय संस्कृति पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुहर: वरमाला ही नहीं, विधि से 7 फेरे लेने पर ही मान्य होगी शादी..


आजकल अक्सर देखा जाता है कि एक प्रेमी की प्रेमिका ने मंदिर जाकर शादी कर ली। और इसे वैध भी माना जाता था। यह खबर आज के तथाकथित उदारवादी लोगों को आहत कर सकती है, जो सभ्यता, रीति-रिवाजों और परंपराओं पर हमला करके खुद को कूल डूड कहते हैं। लेकिन अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक तरह से भारतीय संस्कृति को नमन करते हुए संस्कृति का मजाक उड़ाने वालों पर सीधा प्रहार किया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ एक-दूसरे को माला पहनाने से ही शादी नहीं हो जाती। कभी-कभी एक प्यार करने वाला जोड़ा परिवार के सदस्यों से अदालत में उनकी सुरक्षा के लिए गुहार लगाता था और सरकार उन्हें सुरक्षा प्रदान करती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लव मैरिज को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। ग्वालियर बेंच ने कहा कि सिर्फ माला पहनने से शादी नहीं हो जाती।
दरअसल, मुरैना निवासी एक जोड़े की शादी 16 अगस्त को ग्वालियर के लोहा मंडी किला स्थित आर्य समाज मंदिर में हुई थी। और उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट भी मिल गया है। लड़के की उम्र 23 साल और लड़की की 21 साल बताई जा रही है। शादी के बाद जोड़े ने हाईकोर्ट से सुरक्षा मांगी थी। हालांकि इससे पहले वह अपनी सुरक्षा की गुहार लगाने किसी पुलिस के पास नहीं गए थे। कपल ने बताया कि दोनों ने लव मैरिज की है। दोनों के परिजन थाने में झूठी शिकायत कर रहे हैं, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह शादी उनके परिवार वालों की मर्जी के बिना हुई है, इसलिए उन्हें डर है कि उन्हें उनके परिवार वालों से जान का खतरा है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने वैवाहिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कोर्ट से सुरक्षा मांगी।
आपको बता दें कि सुनवाई के दौरान सरकारी वकील दीपक खोत ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें एक भी सबूत पेश नहीं किया गया है कि किसने धमकी दी, कौन खतरे में है, कौन परेशान कर रहा है. है। याचिका सीधे कोर्ट में दाखिल की गई है। अत: यह याचिका विचारणीय प्रतीत नहीं होती है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ माला पहनने से शादी नहीं हो जाती। उसके लिए पूरे विधि-विधान से अग्नि के सात फेरे लेना आवश्यक है।

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