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गुरुवार, 6 अक्टूबर 2022

इस विधि से बनाएं शरद पूर्णिमा की खीर, बरसेगी अमृत की बर्षा, मिलेगी मां लक्ष्मी की कृपा

Sharad Purnima

शरद पूर्णिमा हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन पड़ती है। इस तिथि का वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन प्रेम और कला से परिपूर्ण भगवान कृष्ण ने इस दिन महारास की रचना की थी। इसके अलावा इस दिन चंद्रमा भी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। मान्यता के अनुसार इस दिन खीर को चांद के नीचे रखने का विधान है। क्योंकि इस दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। यह अमृत वर्षा जीवन में सुख, प्रेम और स्वास्थ्य लेकर आती है। इस दिन चंद्रमा की रोशनी में खीर रखना शुभ माना जाता है। इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए।

कैसे बनाएं शरद पूर्णिमा की खीर

शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाने के लिए गाय के दूध को सबसे अच्छा माना जाता है। गाय के दूध में घी और चीनी का प्रयोग करें। गाय के दूध से बनी खीर को कांच, मिट्टी या चांदी के बर्तन में रखें, उसके बाद देवी लक्ष्मी जी को भोग लगाए और चंद्रमा की रोशनी में रखें। दूसरे दिन खाली पेट खीर का सेवन करना चाहिए। ध्यान रहे कि इस खीर का सेवन सूर्योदय से पहले करना चाहिए।

चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का वैज्ञानिक महत्व

दरअसल, शरद पूर्णिमा की रात चांद धरती के काफी करीब होता है। जिससे चंद्रमा से निकलने वाली तरंगों में मौजूद रासायनिक तत्व सीधे पृथ्वी पर गिरते हैं। इसलिए इस रात को चंद्रमा से निकलने वाली तरंगों से पोषक तत्व इस चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर में मिलते हैं। जिसे दूसरे दिन खाली पेट खाने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।

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