ठंड की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के राज्यों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। इसी महीने धान की कटाई होती है। धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसका सबसे बुरा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि दिल्ली एनसीआर के इलाकों में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अब केंद्र सरकार ने ब्रिक्स पैलेट और बिजली संयंत्र लगाने के लिए किसानों को आर्थिक मदद देने का फैसला किया है।
बायोमास आधारित पैलेट की बढ़ती मांग
बायोमास आधारित पैलेट की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। ब्रिक्स पैलेट और बिजली संयंत्रों की स्थापना के लिए पराली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अंतर्गत आने वाले जिलों के किसानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पराली देने पर किसानों को उसका उचित मूल्य भी दिया जाएगा।
जाने कितना मिलेगा अनुदान
सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक नॉन टॉरफेड पैलेट प्लांट के लिए 14 लाख रुपये प्रति टन/घंटा दिया जाएगा। इस पर किसानों और उद्यमियों को 70 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा सकता है। वहीं, एक टॉरड पैलेट प्लांट के लिए अधिकतम 28 लाख रुपये प्रति टन/घंटा की सब्सिडी दी जा रही है। यह 1.4 करोड़ की अधिकतम सब्सिडी है।
जाने उत्पादन क्षमता
भारत सरकार ने हर साल 1 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक धान की पुआल आधारित पैलेट के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। दूसरी ओर, पानीपत में 2जी एथेनॉल प्लांट से हर साल 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की पराली का उत्पादन होने की उम्मीद है।
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