खून की अवैध बिक्री पर लगेगा अंकुश

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ब्लड देने के बदले अब ब्लड बैंक अनाप शनाप रकम नहीं वसूल सकेंगे। सरकार ने साफ किया है कि खून बेचने के लिए नहीं होता, यह सिर्फ सप्लाई के लिए है। इसके लिए ब्लड बैंक केवल प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं। अब तो सरकार ने इसकी भी लिमिट तय कर दी है। जो 250 से लेकर 1500 के बीच होगी। यानी कि प्रोसेसिंग फीस के नाम पर भी अगर कोई चार्जेस हैं, तो वो भी अब सरकार के नए नियमो के तहत ही दिए जाएंगे। तो आए जानते है, कि सरकार के इस दिशा निर्देश के क्या मायने हैं। क्या इससे ब्लड की अवैध खरीद फरोख्त पर लगाम लग पाएगी। यह आखिर चल क्यों रही थी। और रक्तदान जो बार-बार महादान कहा जाता है। अल्टीमेटली क्योंकि उससे जुड़ा हुआ यह विषय है। ऐसे में रक्तदान के प्रति लोग कैसे ज्यादा से ज्यादा आगे आए।
अस्पतालों और प्राइवेट ब्लड बैंक में ब्लड देने के बदले मोटी रकम वसूलने पर सरकार ने लगाम लगा दी है। सरकार ने दिशा निर्देश जारी किया है कि खून बेचने के लिए नहीं होता, यह केवल आपूर्ति के लिए है। ऐसे में ब्लड बैंक केवल इस पर प्रोसेसिंग फी लगा सकते हैं। दरअसल ब्लड की खरीद फरोख्त को लेकर देश भर से शिकायतें आती रहती है। आपातकालीन स्थितियों में जरूरतमंदों को बहुत महंगी कीमत में खून खरीदना पड़ता है। सरकार का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। डीसीजीआई की ओर से जारी नए दिशा निर्देश देश के सभी राज्यों को सख्ती से पालन करने की बात कही है। अस्पताल और ब्लड बैंक अब ब्लड देने के बदले केवल प्रोसेसिंग फी ले सकेंगे। सरकार ने इसकी लिमिट भी तय कर दी है। यानी अब अस्पताल या ब्लड बैंक प्रोसेसिंग फी के तौर पर 250 से लेकर 1550 तक ही ले सकेंगे। खासकर सरकार ने होल ब्लड या पैक्ड रेड ब्लड सेल्स के लिए जहां सरकारी अस्पताल में प्रोसेसिंग फी 1150 और प्राइवेट के लिए 1550 फिक्स किया है जबकि प्लाज्मा और प्लेटलेट के लिए ये रकम 400 प्रति पैक से अधिक नहीं हो सकती। दरअसल यह शिकायतें कई बार मिल चुकी है कि कई प्राइवेट हॉस्पिटल और ब्लड बैंक लोगों से प्रति यूनिट ब्लड के लिए 2000 से लेकर 6000 रूपए तक वसूलते हैं। इसके अलावा ब्लड की कमी होने की स्थिति में या रेयर ब्लड ग्रुप के मामले में तो कई बार यह रकम 10,000 से अधिक की होती है। सच्चाई यह है कि भारत में सालाना 1 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत होती है। लेकिन उपलब्धता है। केवल 75 लाख यूनिट की, यानी सालाना करीब 25 लाख यूनिट ब्लड की देश में कमी रहती है। यही वजह है कि ब्लड की अवैध तरीके से खरीद फरोख्त होती है। तो इस कमी को कैसे पूरा किया जा सकता है। इसका जवाब यह है कि लोगों को ब्लड डोनेशन के लिए आगे आना चाहिए। आए जानते है ब्लड डोनेशन इसके कई फायदे हैं,
    1.  ब्लड डोनेट करने से खून पतला होता है।
    2. हार्ट को हेल्दी रखता है।
    3. वहीं खून देने से नए ब्लड सेल्स बनते हैं।
    4. इससे बॉडी हेल्दी रहती है

वहीं जितना ब्लड डोनेट किया गया होता है उसे बॉडी 21 दिन में फिर से तैयार कर लेती है। यानी रक्तदान सेहत के लिए होता है वरदान। ब्लड डोनेट करने के फायदे की बात करें तो, जो लोग ब्लड डोनेट करते हैं उनका एक कार्ड बन जाता है। जरूरत पड़ने पर इन्हें आसानी से ब्लड मिल जाता है। कोई भी जिसकी उम्र 18 से 65 साल के बीच हो वजन 45 किलो या इससे अधिक हो साथ ही हीमोग्लोबिन का स्तर 12.5% से कम ना हो ऐसे लोग ब्लड डोनेट कर सकते हैं। आपकी दिए गए ब्लड से दुर्घटना के शिकार किसी शख्स की जान बचाई जा सकती है। खासकर थैलेसीमिया सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को जिंदगी देने में आपका दान किया हुआ ब्लड वरदान साबित हो सकता है। यही वजह है कि रक्तदान को महादान कहा गया है।

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