नया साल आएगा तो देश का नया बजट भी आएगा, 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन देश का यूनियन बजट पेश कर सकती हैं। इस दौरान कई अहम ऐलान हो सकते हैं। अब तक वित्त मंत्रालय के पास किन-किन सेक्टर्स के सुझाव आ गए हैं। ताजा अपडेट्स क्या है आए जाने
बजट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर फोकस हो सकता है। कुछ प्रोडक्ट्स पर सरकार इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर लगाने का विचार कर सकती है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के सामने सुझाव रखे हैं। इसमें 13-14 उत्पादों की एक लिस्ट शेयर की गई है। नौकरी पेशा लोगों को टैक्स छूट में बड़ी राहत मिल सकती है। इस बार बजट में बढ़ सकती है, स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट, अभी इनकम टैक्स एक्ट के तहत 50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। जिसे बढ़ाकर 1 लाख करने की मांग की गई है। न्यू टैक्स रेजीम में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद अब एक और नई टैक्स शूट को न्यू टैक्स रेजीम में शामिल किया जा सकता है। सूत्रों की माने तो ईपीएफ यानी कि एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड को न्यू टैक्स रेजीम में जोड़ने की प्लानिंग है। सूत्रों के मुताबिक इससे न्यू टैक्स सिस्टम में 80सी को जोड़ने का रास्ता साफ हो सकता है। पीपीएफ में निवेश करने वालों को मिल सकता है दुगना फायदा। इस बार बजट में पीपीएफ की निवेश की लिमिट बढ़ाने पर फैसला लिया जा सकता है। पीपीएफ की मिनिमम निवेश लिमिट 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख हो सकती है। बतादें कि 1.5 लाख की लिमिट पर टैक्स छूट मिलती है। स्टार्टअप्स चाहते हैं कि इस बार टैक्स सुधार के मोर्चे पर राहत मिले। इसके अलावा फंडिंग तक पहुंच आसान हो, वहीं लोन की एक्सेसिबिलिटी के लिए कुछ खास ऐलान हो। होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है। सूत्रों की माने तो टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख तक की छूट को बढ़ाकर 5 लाख किया जा सकता है। इंडस्ट्रीज ने भी इसे लेकर डिमांड रखी थी। बजट सत्र से पहले वित्त मंत्रालय ने दूसरे मंत्रालयों और विभागों से खर्च के प्रस्ताव मांगे हैं। 8 जनवरी तक मंत्रालय वालों को सप्लीमेंट्री प्रपोजल सबमिट करने के निर्देश दिए गए हैं। इन प्रपोजल का मकसद अनावश्यक खर्च में कमी लाना है। वोट ऑन अकाउंट बजट की वजह से इस वित वर्ष सरकार भी निवेश पर फोकस घटा सकती है। सरकार 2024 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला ले रही है। हालांकि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सरकार प्राइवेटाइजेशन पर फोकस बढ़ाएगी। आगामी वित वर्ष में केंद्र सरकार मनरेगा के लिए एलोकेशन बढ़ा सकती है। केंद्र सरकार ने साल 2014 से लगातार इस स्कीम के तहत एलोकेशन बढ़ाया है। लेकिन वित वर्ष 2023-24 में इसे घटाया था। अब 2024-25 के अंतरिम बजट में एक बार फिर एलोकेशन बढ़ाने पर फोकस हो सकता है। इस साल पेश होने वाले बजट में प्रीजम टैक्सेशन को और आसान बनाने पर फोकस हो सकता है। वित्तमंत्री सेल्फ एंप्लॉयड इंडिविजुअल्स को इनकम टैक्स की नई रेजीम से पुरानी रेजीम में स्विच करने की सुविधा दे सकती हैं।
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