वाटर समिट वैश्विक जल संबंधी चुनौतियों को हल करने के लिए एक साथ काम करने हेतु विभिन्न देशों और संगठनों के लोगों को एकजुट करना है। इसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी डब्ल्यू एमओ के तत्वाधान में आयोजित नहीं किया जाता है। फ्रांस और कजाकिस्तान सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान वन वाटर समिट की मेजबानी करेंगे। गौरतलब है कि जल की समस्या आमतौर पर स्थानीय होती है। लेकिन साथ मिलकर काम करने से विभिन्न देश एक दूसरे की मदद कर सकते हैं। तकनीकें साझा कर सकते हैं और समाधान निकाल सकते हैं।
एसजीआर यानी स्पेशल ड्राइंग राइट्स, ना तो मुद्रा है और ना ही आईएमएफ पर दावा। बल्कि यह आईएमएफ के सदस्यों की स्वतंत्र रूप से प्रयोग करने योग्य मुद्राओं पर एक संभावित दावा है। इन मुद्राओं के एवज में एसडीआर का आदान प्रदान किया जा सकता है। एसडीआर आईएमएफ और कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के खाते की इकाई के रूप में कार्य करता है। एसडीआर मुद्रा की कीमत का निर्धारण यूएस डॉलर में मूल्यों को जोड़कर किया जाता है। जो बाजार विनिमय दर मुद्राओं की एक एसडीआर बास्केट पर आधारित होता है। मुद्राओं की एसडीआर बास्केट में यूएस डॉलर, यूरो, जापानी येन, पाउंड, स्टर्लिंग एवं चीनी रनमन भी वर्ष 2016 में शामिल है। एसडीआर मुद्रा के मूल्यों का दैनिक मूल्यांकन अवकाश को छोड़कर या जिस दिन आईएमएफ व्यवसायिक गतिविधियों के लिए बंद हो होता है। एवं मूल्यांकन बास्केट की समीक्षा तथा इसका समायोजन प्रत्येक 5 वर्ष के अंतराल पर किया जाता है।
ईपीए का अधिनियम जून 1972 स्टॉकहोम सम्मेलन में स्टॉकहोम में आयोजित मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को देश में प्रभावी बनाने हेतु किया गया। गौर तलब है कि भारत ने मानव पर्यावरण में सुधार के लिए उचित कदम उठाने हेतु इस सम्मेलन में भाग लिया था। ईपीए सरकार को पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम नियंत्रण और कमी के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की योजना बनाने तथा निष्पादित करने का अधिकार देता है। यह अधिनियम केंद्र सरकार को किसी भी उद्योग के संचालन या प्रक्रिया को बंद करने निषेध करने या नियंत्रित करने का निर्देश देने का अधिकार देता है। बता दें कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को एनजीटी अधिनियम 2010 के तहत की गई थी। पर्यावरण संरक्षण, वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों सहित पर्यावरण से संबंधित किसी भी कानूनी अधिकार के प्रवर्तन, दुष्प्रभाव व्यक्ति अथवा संपत्ति के लिए अनुतोष, और क्षति पूर्ति प्रदान करने एवं इससे जुड़े हुए मामलों के प्रभावशाली एवं त्वरित निपटारे के लिए।
लॉस एंड डैमेज के बारे में यह फंड जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों का सामना करने वाले देशों का बचाव और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए एक वैश्विक वित्तीय पैकेज है। यह शब्द उस मुआवजे को संदर्भित करता है। जो अमीर राष्ट्रों को भुगतान करना होगा। यहां अमीर राष्ट्रों से तात्पर्य है कि जिनके औद्योगिक विकास के कारण ग्लोबल वार्मिंग हुई है। साथ ही जिसने ग्रह पर जलवायु संकट की स्थिति पैदा की है और गरीब देशों जिनका कार्बन पद चिन्ह कम है। समुद्र के बढ़ते स्तर, बाढ़, भयावह सूखे और तीव्र चक्रवा तों आदि का खामियाजा भुगत रहे हैं। लॉस एंड डैमेज फंड की निगरानी शुरुआत में विश्व बैंक करेगा। धन प्राप्ति का स्रोत अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे समृद्ध देशों के साथ-साथ कुछ विकासशील देश भी होंगे।
स्टील प्लास्टिक और अन्य खनिजों की तुलना में एलुमिनियम पुनर्चक्रण योग्य पर्यावरण के अनुकूल संक्षारण प्रतिरोधी और अत्यधिक लचीली धातु है। भारत में विद्युत क्षेत्र में 48% एलुमिनियम की खपत होती है। इसके बाद ऑटोमोबाइल और परिवहन में 15% निर्माण में 13% उपभोक्ता टिकाव वस्तुओं में 7% मशीनरी एवं उपकरण में 7% पैकेजिंग में 4% तथा अन्य में 6% शामिल है। हालांकि भारत की प्रति व्यक्ति खपत विश्व औसत का 1 चौथाई है। एलुमिना बॉक्साइड से प्राप्त होता है। 1 टन एलुमिना का उत्पादन करने के लिए लगभग 3 से 3.5 टन बॉक्साइड की आवश्यकता होती है, और एक टन एलुमिनियम का उत्पादन करने के लिए लगभग दो टन एलुमिना की आवश्यकता होती है। भारत में बॉक्साइड के भंडार पाए जाते हैं। लेकिन खनन बढ़ाने के लिए खनिज युक्त क्षेत्रों तक पहुंच, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण तथा वन मंजूरी से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है। बॉक्साइट खदानों का निर्बाध आवंटन और उत्पादकों को उच्च गुणवत्ता, जलवायु लचीले एलुमिनियम निर्माण के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना वर्तमान में महत्त्वपूर्ण है।
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