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शनिवार, 7 जून 2025

पीएम-प्रणाम योजना: रासायनिक उर्वरकों से आज़ादी की ओर एक बड़ा कदम

Pranam Scheme


भारत सरकार की पीएम-प्रणाम योजना (PM-PRANAM Scheme) जो चर्चा में है क्योंकि इसने देश में सिंथेटिक (रासायनिक) उर्वरकों के उपयोग में उल्लेखनीय कमी लाने में सफलता पाई है। वर्ष 2023-24 में करीब 15.14 लाख टन रासायनिक उर्वरकों का कम इस्तेमाल किया गया, जिससे सरकार को सब्सिडी में भारी बचत हुई।

👉 इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाई कर्नाटक राज्य ने, जिसने अकेले 30% तक सब्सिडी बचत में योगदान दिया। इसके बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा, जिन्होंने मिलकर 58% से अधिक योगदान दिया।

 

🌱 पीएम-प्रणाम योजना क्या है?

PM-PRANAM (Promotion of Alternate Nutrients for Agriculture Management) योजना को जून 2023 में केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य है:

रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करना
किसानों को जैविक और प्राकृतिक उर्वरकों की ओर प्रेरित करना
खेती को टिकाऊ (Sustainable) और पर्यावरण के अनुकूल बनाना

 

📅 योजना की अवधि और लक्ष्य

यह योजना 2023-24 से 2025-26 तक की तीन वर्षों के लिए लागू की गई है। इसका मुख्य लक्ष्य है:

🔹 ₹10,000 करोड़ तक की उर्वरक सब्सिडी बचाना
🔹 रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना

 

योजना के प्रमुख तत्व

  • इंटीग्रेटेड फर्टिलाइज़र मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के जरिए उर्वरकों के उपयोग पर नज़र रखी जाती है।
  • राज्य सरकारों को यूरिया, DAP, NPK, MOP जैसे उर्वरकों के विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
  • इससे मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों की स्वच्छता और जैव विविधता संरक्षण को भी बल मिलता है।

 

💰 सब्सिडी और पुरस्कार

केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी की बचत का:

  • 50% हिस्सा संबंधित राज्य को दिया जाता है
    • इसमें से 70% वैकल्पिक उर्वरकों के उत्पादन व तकनीक में खर्च होता है
    • और 30% उन किसानों, पंचायतों और हितधारकों को प्रोत्साहन देने में, जो रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग में भागीदारी निभाते हैं

 

PM-PRANAM योजना न केवल उर्वरकों पर सरकार के खर्च को कम कर रही है, बल्कि यह भारत की कृषि को हरित, स्वच्छ और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जैविक खेती की ओर बढ़ना आज के समय की ज़रूरत भी है और समाधान भी।

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