पिछले कुछ वर्षों में, सेना ने चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने के लिए कई तरह की विशेषताओं वाले ड्रोन खरीदे हैं। इनमें कामिकेज़ ड्रोन और आर्टिलरी ड्रोन शामिल हैं। चीन से लगी सीमा पर निगरानी कड़ी करने के लिए सेना ने 363 नए ड्रोन खरीदने का टेंडर जारी किया है। इन ड्रोन के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल(आरएफपी) में कहा गया है कि ऊंचाई वाले इलाकों के लिए एक्सेसरीज के साथ 163 ड्रोन और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों के लिए 180 लॉजिस्टिक ड्रोन की जरूरत है। इनमें से प्रत्येक ड्रोन का वजन 100 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए और तेज हवाओं का सामना करने में सक्षम होना चाहिए। इनके लिए बोली 11 नवंबर तक दी जा सकती है। इन ड्रोन से सैनिकों और कुलियों को हथियार और आपूर्ति ले जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। वे कम से कम 1,000 लैंडिंग करने में सक्षम होंगे और उनकी न्यूनतम सीमा 10 किमी होगी। ये ड्रोन ऊंचाई वाले इलाकों के लिए कम से कम 15 किलो और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में 20 किलो तक के सामान को ले जाने में सक्षम होंगे। इनमें से 60 प्रतिशत तक कलपुर्जों का निर्माण देश में ही किया जाना चाहिए। ड्रोन की आपूर्ति करने वाली फर्म को उनके संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षण भी देना होगा। हाल ही में सेना ने अपनी चुनी हुई इकाइयों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन(ईवी) खरीदने का फैसला किया था। यह कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए केंद्र सरकार की नीति को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम होगा। सेना की चुनिंदा इकाइयों में 25 फीसदी हल्के वाहन, 38 फीसदी बसें और 48 फीसदी मोटरसाइकिलों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन लगाए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने की योजना को अंतिम रूप देने से पहले वाहनों से संबंधित सेना की जरूरत और दुर्गम स्थानों पर उनके इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े इकोसिस्टम में मदद के लिए सेना की इकाइयों में चार्जिंग प्वाइंट जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराए जाएंगे। ईवी चार्जिंग स्टेशनों में कम से कम एक फास्ट चार्जर और दो से तीन स्लो चार्जर होंगे। साथ ही पर्याप्त भार क्षमता वाले बिजली के सर्किट केबल और ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। सेना जल्द ही 60 इलेक्ट्रिक बसों के लिए शुरुआती टेंडर जारी करेगी। स्वदेश निर्मित नए बख्तरबंद वाहन कल्याणी एम4 को सेना के बेड़े में शामिल किया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में, सेना ने चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने के लिए कई तरह की विशेषताओं वाले ड्रोन खरीदे हैं। इनमें कामिकेज़ ड्रोन और आर्टिलरी ड्रोन शामिल हैं। चीन से लगी सीमा पर निगरानी कड़ी करने के लिए सेना ने 363 नए ड्रोन खरीदने का टेंडर जारी किया है। इन ड्रोन के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल(आरएफपी) में कहा गया है कि ऊंचाई वाले इलाकों के लिए एक्सेसरीज के साथ 163 ड्रोन और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों के लिए 180 लॉजिस्टिक ड्रोन की जरूरत है। इनमें से प्रत्येक ड्रोन का वजन 100 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए और तेज हवाओं का सामना करने में सक्षम होना चाहिए। इनके लिए बोली 11 नवंबर तक दी जा सकती है। इन ड्रोन से सैनिकों और कुलियों को हथियार और आपूर्ति ले जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी। वे कम से कम 1,000 लैंडिंग करने में सक्षम होंगे और उनकी न्यूनतम सीमा 10 किमी होगी। ये ड्रोन ऊंचाई वाले इलाकों के लिए कम से कम 15 किलो और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में 20 किलो तक के सामान को ले जाने में सक्षम होंगे। इनमें से 60 प्रतिशत तक कलपुर्जों का निर्माण देश में ही किया जाना चाहिए। ड्रोन की आपूर्ति करने वाली फर्म को उनके संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षण भी देना होगा। हाल ही में सेना ने अपनी चुनी हुई इकाइयों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन(ईवी) खरीदने का फैसला किया था। यह कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए केंद्र सरकार की नीति को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम होगा। सेना की चुनिंदा इकाइयों में 25 फीसदी हल्के वाहन, 38 फीसदी बसें और 48 फीसदी मोटरसाइकिलों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन लगाए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा था कि इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने की योजना को अंतिम रूप देने से पहले वाहनों से संबंधित सेना की जरूरत और दुर्गम स्थानों पर उनके इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े इकोसिस्टम में मदद के लिए सेना की इकाइयों में चार्जिंग प्वाइंट जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराए जाएंगे। ईवी चार्जिंग स्टेशनों में कम से कम एक फास्ट चार्जर और दो से तीन स्लो चार्जर होंगे। साथ ही पर्याप्त भार क्षमता वाले बिजली के सर्किट केबल और ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। सेना जल्द ही 60 इलेक्ट्रिक बसों के लिए शुरुआती टेंडर जारी करेगी। स्वदेश निर्मित नए बख्तरबंद वाहन कल्याणी एम4 को सेना के बेड़े में शामिल किया गया है।
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