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शनिवार, 15 अक्टूबर 2022

महाभारत काल के इस जलकुंड का रहस्य विज्ञान आज तक नहीं जान पाए, अथाह जल, गहरा नीला रंग, गदा लगने के संकेत...

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प्रसिद्ध भौतिकी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में अपनी डायरी के पन्नों पर लिखा, "जब मैंने विज्ञान की दुनिया में प्रवेश किया, तो मुझे विश्वास था कि मैं प्रकृति के रहस्यों को सुलझाऊंगा। लेकिन मुझे लगा कि एक दरवाजे के अंदर दरवाजे पर दरवाजे हैं, जिन तक पहुंचने में मैं नाकाम रहा हूं। अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि प्रकृति के रहस्यों को पूरी तरह से नहीं खोला जा सकता है।

भीम कुंड का अद्भुत रहस्य

धरती पर ऐसे अनगिनत रहस्य छिपे हैं, जिनका सच विज्ञान अब तक उजागर करने में नाकाम रहा है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित भीम कुंड एक ऐसा रहस्य है जो आज भी वैज्ञानिक जिज्ञासा और जिज्ञासा का केंद्र है। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भीम कुंड छतरपुर जिले की बादामलहारा तहसील से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर एक गुफा में स्थित है। आज यहां जंगल नहीं है, लेकिन अनुमान है कि पहले यह स्थान घना जंगल रहा होगा। जिस गुफा के अंदर भीम कुंड स्थित है, उस पर कटाव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो गदा के प्रहार से उसे तोड़ा गया हो।

भीम ने मारी थी गदा 

किंवदंतियों के अनुसार यह कुंड महाभारत काल की घटना का परिणाम है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान जब पांडव इस वन क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब द्रौपदी प्यास से व्याकुल हो गईं। आस-पास पानी का कोई स्रोत नहीं था। नकुल को सिद्धि प्राप्त थी कि वह जल स्रोत का पता लगा सकता है। नकुल ने ध्यान किया और इस स्थान पर जमीन के अंदर एक जल स्रोत के अस्तित्व का खुलासा किया। लेकिन उनके पास पहुंचने का कोई रास्ता नहीं होने के कारण भीम ने इस स्थान पर उन्हें अपनी गदा से प्रहार किया। इसके बाद वहां पानी की धारा बहने लगी, जिससे द्रौपदी की प्यास बुझ सकी।

नहीं पता चलता पानी का स्रोत 

भीम कुंड का पानी गहरे नीले रंग का है। इसमें पानी का एक विशाल भंडार है। पानी कहां से आता है और कहां जाता है, इस बात को विज्ञान छुपाने में नाकाम रहा है। गोताखोरों ने वैज्ञानिक शोध के लिए कई बार कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

इंद्रधनुष की छाया करती है मोहित 

सुनामी के दौरान इस कुंड का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ गया था। इसलिए यह माना जाता था कि कहीं न कहीं समुद्र के साथ कुंड का सीधा संपर्क है। इस कुंड में अगर कोई व्यक्ति डूबता है तो उसका आज तक पता नहीं चल सका है। फिलहाल इसे चारों तरफ से जाली से ढक दिया गया है। जब सूर्य की किरणें गुफा के शीर्ष पर खिड़की से गुजरती हुई इस कुंड के जल निकाय पर पड़ती हैं, तो यह एक बहुत ही सुंदर इंद्रधनुषी छटा बिखेरती है।

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