आज पूरे विश्व के लिए महंगे और अत्यधिक प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से छुटकारा पाना अधिक जरूरी हो गया है। इस मुद्दे का समाधान करने के लिए भारत का दृष्टिकोण और रणनीति बहुआयामी प्रकृति के रहे हैं। भारत ने 2022 की पहली छमाही में सौर उत्पादन के माध्यम से ईंधन लागत में 4.2 बिलियन अमरीकी डॉलर की बचत की और देश को 19.4 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता से भी बचा लिया। विश्व स्तर पर सबसे कम लागत पर सौर ऊर्जा उत्पादन में देश अग्रणी बन गया है। देश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में इतनी अधिक तरक्की कर ली है कि यह आज चीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है, जो आम तौर पर हर चीज का सबसे सस्ता निर्माता है। वास्तव में भारत ने 2021 में दुनिया की दूसरी सबसे सस्ती सौर ऊर्जा 2.88 रुपये/kWh (चीन के 2.80 रुपये/kWh पर) की पेशकश की है। इसके साथ ही भारत एकमात्र देश के रूप में भी उभरा जहां चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, यूके और यूएस सहित अन्य आठ प्रमुख बाजारों की तुलना में 80% की सबसे तेज दर पर 2010 और 2018 के बीच सौर पीवी परियोजनाओं की स्थापना की लागत में भारी गिरावट आई थी। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का नेतृत्व करने से भारत वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दे रहा है, जबकि घरेलू स्तर पर निरंतर सौर विस्तार इसे ऊर्जा-कुशल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की ओर ले जाता है। गुजरात में भारत के पहले सौर ऊर्जा से चलने वाले गांव मोढेरा की निवासी कैलाश बेन कहती हैं कि पहले जब सोलर नहीं था तो बिजली बिल के लिए बड़ी रकम (करीब 2000 रुपए) चुकानी पड़ती थी। सोलर लगाने के बाद बिजली बिल के लिए मुझे कोई पैसे नहीं चुकाने पड़ते अर्थात बिजली बिल शून्य आता है नहीं आता है। मेरे घर में अब फ्रिज से लेकर वाशिंग मशीन तक सब कुछ सोलर से चलता है। मैं अब एक रुपये का भी बिजली का बिल नहीं दे रही हूं। भारत के सौर मिशन के सबसे बड़े लाभार्थी देश के दूरदराज के इलाके और ग्रामीण परिवार हैं, जो स्वच्छ खाना पकाने और विद्युतीकरण आदि के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए प्रत्यक्ष लाभ बन रहा है। सौर ऊर्जा अपनाने से ग्रामीण भारत में विद्युतीकरण लागत में भारी कमी आ रही है। मोढेरा गांव पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा कुशल और टिकाऊ बनने के लिए एक अच्छा मॉडल है।
'मन की बात' के 99वें संस्करण में पीएम मोदी ने कहा कि जब मैं दुनियाभर के लोगों से मिलता हूं तो वे निश्चित रूप से इस (सौर ऊर्जा) क्षेत्र में भारत की अभूतपूर्व सफलता के बारे में बात करते हैं, भारत के लोगों का सदियों से सूर्य के साथ एक विशेष संबंध रहा है। सूर्य की शक्ति के बारे में हमारे पास जो वैज्ञानिक समझ है, सूर्य की पूजा करने की जो परंपरा वह अन्य जगहों पर कम ही देखने को मिलती है। इसके साथ ही उन्होंने आगे बताया कि मुझे खुशी है कि आज हर देशवासी सौर ऊर्जा के महत्व को समझता है और स्वच्छ ऊर्जा में योगदान देना चाहता है। भारत ने देश में सौर ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सोलर पार्क स्कीम, VGF स्कीम, सीपीएसयू स्कीम, डिफेंस स्कीम, कैनाल बैंक एंड कैनाल टॉप स्कीम, बंडलिंग स्कीम, ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटॉप स्कीम आदि जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं। 28 फरवरी 2023 तक सरकार ने भारत में 39.28 गीगावॉट की कुल क्षमता वाले 57 सोलर पार्कों को मंजूरी दी है। 28 फरवरी 2023 तक देश की सौर स्थापित क्षमता 64.381 GWAC थी। बड़े पैमाने पर ग्रिड से जुड़े सौर फोटोवोल्टिक (PV) पहल के अलावा भारत स्थानीय ऊर्जा जरूरतों के लिए ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा विकसित कर रहा है। दूसरी ओर ऑफ-ग्रिड एप्लिकेशन में 7.15 लाख स्ट्रीट लाइट, 17.21 लाख होम लाइट, 75.29 लाख सोलर लालटेन, 2.56 लाख सोलर पंप और 2.14 लाख स्टैंड अलोन पावर प्लांट शामिल हैं। भारत की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता लगभग 61.97 GW (नवंबर 2022 तक) तक पहुंच गई है। इस तरह देखा जाए तो वर्तमान में भारत में सोलर टैरिफ बहुत प्रतिस्पर्धात्मक है और इसने ग्रिड समानता हासिल कर ली है। जिस गति से देश का सौर मिशन नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वह सतत विकास की दिशा में जिम्मेदारियों प्रति भारत के प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
भारत में सूर्य को देव की संज्ञा दी जाती है, जिन्होंने जीवन को विभिन्न रूप दिए हैं और उसे बनाए रखा है। प्राचीन काल से ही भारत में सूर्य के महत्व पर पर्याप्त जोर दिया जाता रहा है, जो कई अन्य खोई हुई परंपराओं और मान्यताओं के विपरीत आधुनिक काल तक मौजूद सूर्य से संबंधित प्रथाओं में दिखती हैं। पीएम मोदी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने के आह्वान और दुनियाभर में इसकी व्यापक स्वीकृति ने भारत की सॉफ्ट पावर को कई गुना बढ़ा दिया है। सूर्य नमस्कार अच्छे स्वास्थ्य के लिए एकीकृत यौगिक मुद्रा प्रणाली है और अब इसे विश्व स्तर पर अपनाया जा चुका है। कोणार्क सूर्य मंदिर शायद देश के सभी सूर्य पूजा स्थलों में सबसे महत्वपूर्ण है। चाहे वह भारत की भौगोलिक स्थिति हो या छठ पूजा जैसी सदियों पुरानी प्रथाओं के माध्यम से सूर्य-पूजा की परंपरा, सूर्य के साथ भारत का जुड़ाव असीम रहा है। 21वीं सदी का तीसरा दशक आ रहा है और सौर ऊर्जा के उपयोग के मिशन के माध्यम से देश ने सूर्य के समुचित उपयोग करने के आवश्यकता को वास्तव में पहचाना है ताकि आजीविका और स्वास्थ्य दोनों का समर्थन करते हुए सूर्य को हमारा मार्गदर्शन करने की परंपरा को अक्षुण्ण रखा जा सके।
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