मानव शरीर मुख्य रूप से पानी से बना है। यह जितना सत्य है उतना ही इस बात में भी दम है कि देश की किसी भी विकास योजना में पानी सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। पानी मानव जीवन के सभी पहलुओं का एक मूलभूत हिस्सा है। हालांकि वर्तमान परिवेश में इस 'कीमती प्राकृतिक संसाधन' को लेकर दुनिया के कुप्रबंधन ने एक स्थायी भविष्य के लिए जल संसाधन को और अधिक आवश्यक बना दिया है। दुनिया के कई हिस्सों में आज भी 'सुरक्षित पानी' तक पहुंच पहले से ही जरूरी है क्योंकि प्रत्येक वर्ष किसी न किसी देश में जल संकट की समस्या उत्पन्न हो जाती है और इसके हर बार और पहले से भी अधिक बड़ी होने का डर है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ बढ़ती हुई मांगों ने अप्रत्याशित जल आपूर्ति की स्थिति को उत्पन्न किया है, जिसने प्रमुख वैश्विक मुद्दों की प्रगति को बाधित किया।
हालांकि इस क्षेत्र में तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत समग्र और व्यापक जल संसाधन प्रबंधन नीति और संरक्षण के साथ एक अग्रणी देश के रूप में उभर रहा है। देश विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के नियमित कार्यान्वयन के साथ जल प्रबंधन के उद्देश्य का समर्थन करता रहा है। साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ती पानी की कमी और जलवायु-प्रेरित आपदाओं की पृष्ठभूमि के खिलाफ देश ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन 2023 में जल क्षेत्र में 240 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिससे सम्मेलन में भाग लेने वाले लगभग सभी देशों और हितधारकों से समर्थन मिला। उन देशों ने भारत के विजन से प्रेरित जल और स्वच्छता संकट को हल करने के लिए अपना संकल्प भी व्यक्त किया। सही अर्थों में देखा जाए तो यह समस्या एक अवसर है दुनिया को एकजुट करने का, क्योंकि यह न सिर्फ सामान्य जीवन पर असर डाल रहा है, बल्कि विकास की संभावनाओं को भी धीमा कर रहा है। सम्मेलन के दौरान सभी बलों ने एसडीजी 6 और अन्य विश्व स्तर पर स्वीकृत जल-संबंधी लक्ष्यों पर प्रगति में तेजी लाने के लिए सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की, ताकि आवश्यक और लक्षित गति से तीव्र और परिवर्तनकारी बदलाव हो सके। इसके अलावा देशों से आने वाले नवीनतम डेटा से पता चलता है कि सभी सरकारों को एसडीजी 6 को समय पर पूरा करने के लिए औसतन चार गुना तेजी से काम करना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से दुनिया इस समय इस क्षेत्र में ट्रैक से बाहर है। हालांकि यह भी व्यापक रूप से स्वीकार किया गया था कि यह ऐसी स्थिति नहीं है जिसे कोई अकेला या समूह हल कर सकता है; बल्कि सभी को मिलकर इस मुद्दे पर काम करने की जरूरत है।
सौभाग्य से भारत में भले ही पानी एक राज्य का विषय है, लेकिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से तकनीकी और वित्तीय सहायता के माध्यम से केंद्र राज्यों के प्रयासों को पूरा करता है और MGNREGS, अटल भूजल योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, अटल मिशन, कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन(अमृत), दिल्ली के एकीकृत भवन उपनियम(UBBL), मॉडल बिल्डिंग उपनियम(MBBL), शहरी और क्षेत्रीय विकास योजना निर्माण और कार्यान्वयन दिशानिर्देश, जल शक्ति अभियान और जल जीवन मिशन अन्य के माध्यम से कई जल संरक्षण कार्यक्रम चला रहा है। यही वजह है कि आज देश में 11 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास नल के पानी का कनेक्शन है। भारत में 123 जिलों और 1.53 लाख से अधिक गांवों ने 'हर घर जल' की सूचना दी है, जिसका अर्थ है कि हर घर में नल के माध्यम से पीने का साफ पानी उपलब्ध है। हम पानी की समस्या को हल्के में नहीं ले सकते, क्योंकि कई देश आज भी सभी निवासियों को 24 घंटे पानी की सेवा प्रदान करने में असमर्थ हैं। इधर देश को अभी भी विचार करना है कि आने वाले दिनों में क्या स्थिति होगी, क्योंकि कुछ लोग कहते भी हैं कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा।
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