100 से अधिक देशों के वार्ताकारों ने गहरे समुद्र की रक्षा के लिए एक संधि पर सहमति बनाई। कानूनी रूप से बाध्यकारी इस समझौते पर न्यूयॉर्क में सहमति बनी। पंद्रह वर्षों की चर्चाओं और पाँच दौर की लंबी वार्ता के बाद संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में यह संधि संपन्न हुई। गहरे समुद्र की रक्षा के लिए यह पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि है।
उद्देश्य:
- समुद्री जैव विविधता के नुकसान को दूर करना
- सतत विकास सुनिश्चित करने में मदद करना
वार्ता का अंतिम दौर 20 फरवरी को शुरू हुआ था। जैव प्रौद्योगिकी जैसे उद्योगों में उपयोग किए जाने वाले "समुद्री आनुवंशिक संसाधनों" के बँटवारे को लेकर भी इस समझौते में देरी हुई। इस संधि को "30X30 डील" के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में देखा जा रहा है। यह संधि देशों को गहरे समुद्र में प्रस्तावित गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के लिए भी बाध्य करेगी। "30X30 डील" : इस दशक के अंत तक दुनिया की 30 प्रतिशत भूमि और समुद्र को संरक्षित करना है। यह पिछले साल दिसंबर में मॉन्ट्रियल में संपन्न हुई थी।
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए 2030 तक हर साल 11 मिलियन वर्ग किमी (4.2 मिलियन वर्ग मील) समुद्र को संरक्षित करने की जरूरत है। गहरे समुद्र देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्रों की सीमा से शुरु हैं, समुद्र का यह क्षेत्र किसी भी देश के अधिकार क्षेत्र नहीं, इसमें दुनिया के महासागरों का 60% से अधिक हिस्सा जबकि फ़िलहाल इसका लगभग 1 प्रतिशत ही संरक्षित है।
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