पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर ऐतिहासिक श्रद्धांजलि – माधव सेवा समिति का प्रेरणादायक आयोजन

Indian History

जालंधर: माधव सेवा समिति, मॉडल टाउन की ओर से पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर की तीसरी जन्मशताब्दी (300 वर्ष) के अवसर पर एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जालंधर के प्रकाशवती सर्वहितकारी विद्या मंदिर में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बहन पूनम भारद्वाज (सहकार भारती) ने विद्यार्थियों को अहिल्याबाई होलकर के जीवन और योगदान से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कैसे अहिल्याबाई ने न सिर्फ़ शासन किया, बल्कि समाज सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए।

💪 महिला सशक्तिकरण की प्रतीक

  • अहिल्याबाई का विवाह मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ था।

  • पति और ससुर के निधन के बाद उन्होंने मालवा राज्य को कुशलता से संभाला।

  • उन्होंने सतीप्रथा, विधवाओं के अधिकार, और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष किया।

  • एक महिला होते हुए भी अपनी करणी सेना के माध्यम से राज्य की रक्षा की मिसाल पेश की।

🛕 धार्मिक धरोहरों का पुनर्निर्माण

अहिल्याबाई होलकर ने न सिर्फ़ मराठा साम्राज्य को संभाला, बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी अनमोल योगदान दिया:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी)

  • सोमनाथ मंदिर (गुजरात)

  • बद्री-केदारनाथ (उत्तराखंड)

  • खजराना गणेश मंदिर (इंदौर)

  • नीलकंठ महादेव मंदिर (मांडू)

उन्होंने इन मंदिरों का पुनर्निर्माण और यात्रियों के लिए धर्मशालाओं व कुओं का निर्माण करवा कर लोक सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।

📿 सांस्कृतिक प्रस्तुति

7 वर्षीय मास्टर रमन कपूर ने विद्यार्थियों और अध्यापकों के समक्ष श्री राम स्तुति, श्री बजरंग बाण और श्री शनि चालीसा का पाठ कर सभी का मन मोह लिया।

🎤 प्रेरणादायक संदेश

  • श्री प्रमोद कालिया ने विद्यार्थियों को सांस्कृतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय मूल्यों से ओत-प्रोत जीवन जीने की प्रेरणा दी।

  • प्रधानाचार्य श्री अनिल शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया।

  • डॉ. रजत सरीन ने अध्यापकों और स्कूल मैनेजमेंट का आभार व्यक्त किया।

🙏 विशेष उपस्थिति

कार्यक्रम में समाज के प्रतिष्ठित सदस्य शामिल हुए:

  • श्री राकेश कपूर (प्रधान, जालंधर इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स वेल्फेयर एसोसिएशन)

  • श्री राहुल मधहोक

  • श्री संदीप बब्बर

  • श्री वरिंदरपाल बंटी

अहिल्याबाई होलकर केवल एक रानी नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा, समाज सुधारक और कुशल प्रशासिका थीं। इस तरह के आयोजनों से नई पीढ़ी को उनके महान जीवन से सीखने और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है।