जालंधर में डी.ए.पी. खाद की बिक्री पर सख्त आदेश; किसानों से मनमानी वसूली पर होगी कार्रवाई

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जालंधर, 12 नवंबर: जिला प्रशासन ने किसानों के हित में बड़ा कदम उठाया है। डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि कोई भी निजी उर्वरक विक्रेता या सहकारी समिति डी.ए.पी. (DAP) खाद के साथ जबरन कोई अन्य सामग्री जैसे नैनो यूरिया या अतिरिक्त उर्वरक किसानों को खरीदने के लिए मजबूर नहीं करेगी।

डा. अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ विक्रेता किसानों को डी.ए.पी. खाद के साथ अन्य सामग्री थोप रहे हैं और निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ एफ.सी.ओ. 1985 (FCO 1985) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।


🚜 किसानों के लिए राहत: तय कीमत पर ही मिलेगा डी.ए.पी. खाद

जिला प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक किसान को उसकी खेती की आवश्यकता के अनुसार डी.ए.पी. खाद उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, यदि डी.ए.पी. की आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी आती है, तो विकल्प के रूप में अन्य उर्वरक जैसे –

  • NPK 12:32:16

  • NPK 20:20:0:13

  • NPK 15:15:15

  • NPK 16:16:16

  • सिंगल सुपरफॉस्फेट (SSP)

  • ट्रिपल सुपरफॉस्फेट (TSP)

को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि गेहूं की समय पर बुवाई सुनिश्चित की जा सके।


📞 शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

यदि किसी किसान को डी.ए.पी. या अन्य खाद की खरीद में कोई समस्या आती है, तो वह तुरंत एक्शन हेल्पलाइन नंबर 9646-222-555 पर शिकायत दर्ज करा सकता है।

डा. अग्रवाल ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन किसानों को किसी भी प्रकार की खाद की कमी नहीं होने देगा।


🔍 उर्वरक विक्रेताओं की जांच होगी तेज

डिप्टी कमिश्नर ने कृषि विभाग के ब्लॉक कृषि अधिकारियों और सहकारी समितियों के निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे उर्वरक विक्रेताओं की नियमित जांच करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करें।

इसके अलावा, सभी विक्रेताओं और सहकारी समितियों को आदेश दिया गया है कि वे अपनी डी.ए.पी. आपूर्ति और वितरण का पूरा रिकॉर्ड तैयार करें और 16 नवंबर तक रिपोर्ट जमा करें।


🌱 प्रशासन की सख्ती से किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

इन आदेशों के बाद अब किसानों को डी.ए.पी. खाद तय मूल्य पर और बिना किसी अतिरिक्त दबाव के मिलेगी। प्रशासन का यह कदम न केवल किसानों को राहत देगा, बल्कि कृषि उत्पादन और गेहूं बुवाई के सीजन में संतुलित उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।