19वें विश्व मौसम विज्ञान कॉंग्रेस का आयोजन 22 मई से 2 जून 2023 के बीच में जिनेवा के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में किया जा रहा है। यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सर्वोच्च निकाय है। इसी सत्र में ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस वॉच को मंजूरी मिली है, जो ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस के लिए निगरानी पहल है। जी-3 डब्ल्यू की स्थापना का प्रस्ताव विश्व मौसम विज्ञान कांग्रेस ने रखा, जिसका समर्थन एकमत से डब्लू एमओ के 193 सदस्यों ने किया। इस पहल के द्वारा ऊष्मा को अवशोषित करने वाली गैसों को कम करना और जलवायु परिवर्तन का सामना करना है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में मान्यता दी और स्वास्थ सेवाओं को बढ़ाने के लिए 10 साल की एक कार्ययोजना का समर्थन भी किया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने डब्ल्यूएचओ के सहयोग से इस कार्यान्वयन योजना को तैयार किया है, जो वर्ष 2023 से 2233 तक के लिए होगी। इसका मूल उद्देश्य मौजूदा और व्रती चरम मौसम की घटनाओं, जलवायु परिवर्तनों पर्यावरणीय जोखिमों का सामना कर रहे लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ और कल्याण प्राप्त करना है। इसके द्वारा जलवायु परिवर्तन, मौसम, वायु प्रदूषण, पराबैंगनी विकिरण चरम घटनाओं और स्वास्थ्य के साथ अन्य पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव के प्रबंधन के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना भी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अंतर सरकारी संगठन है और वर्तमान में 193 देश इस संगठन के सदस्य हैं। इसकी स्थापना 23 मार्च 1950 को हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा स्विट्जरलैंड में है। भारत भी विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सदस्य देश है।
19वें विश्व मौसम विज्ञान कॉंग्रेस का आयोजन 22 मई से 2 जून 2023 के बीच में जिनेवा के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में किया जा रहा है। यह विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सर्वोच्च निकाय है। इसी सत्र में ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस वॉच को मंजूरी मिली है, जो ग्लोबल ग्रीनहाउस गैस के लिए निगरानी पहल है। जी-3 डब्ल्यू की स्थापना का प्रस्ताव विश्व मौसम विज्ञान कांग्रेस ने रखा, जिसका समर्थन एकमत से डब्लू एमओ के 193 सदस्यों ने किया। इस पहल के द्वारा ऊष्मा को अवशोषित करने वाली गैसों को कम करना और जलवायु परिवर्तन का सामना करना है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन को मानव स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में मान्यता दी और स्वास्थ सेवाओं को बढ़ाने के लिए 10 साल की एक कार्ययोजना का समर्थन भी किया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने डब्ल्यूएचओ के सहयोग से इस कार्यान्वयन योजना को तैयार किया है, जो वर्ष 2023 से 2233 तक के लिए होगी। इसका मूल उद्देश्य मौजूदा और व्रती चरम मौसम की घटनाओं, जलवायु परिवर्तनों पर्यावरणीय जोखिमों का सामना कर रहे लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ और कल्याण प्राप्त करना है। इसके द्वारा जलवायु परिवर्तन, मौसम, वायु प्रदूषण, पराबैंगनी विकिरण चरम घटनाओं और स्वास्थ्य के साथ अन्य पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव के प्रबंधन के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना भी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अंतर सरकारी संगठन है और वर्तमान में 193 देश इस संगठन के सदस्य हैं। इसकी स्थापना 23 मार्च 1950 को हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा स्विट्जरलैंड में है। भारत भी विश्व मौसम विज्ञान संगठन का सदस्य देश है।
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