वो तो झांसी वाली रानी थी।
हम सभी ने ये पंक्तिया कभी ना कभी जरूर सुनी होंगी। आज यानि 17 जून को इसी कविता की नायिका की पुण्यतिथि है। दरअसल हम बात कर रहे है झांसी की रानी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की जो हमारे देश की अभूतपूर्व विरांगनाओं में से एक थी।
तो चलिए जानते हैं रानी लक्ष्मीबाई के बारे में। इनका जन्म 19 नवंबर 1835 को मध्य प्रांत उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था। इनका विवाह झांसी के महाराज गंगाधर राव से हुआ था। अपनी मृत्यु से ठीक पहले महाराजा ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में एक बच्चे को गोद लिया। तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने दत्तक उत्तराधिकारी को मान्यता देने से इनकार कर दिया और झांसी पर कब्जा कर लिया। 22 वर्षीय रानी ने झांसी को अंग्रेजों को सौंपने से इनकार कर दिया और 1857 में मेरठ में शुरू हुए विद्रोह में शामिल हो गए। 1857-58 के भाटी विद्रोह के दौरान इन्होंने तेजी से अपने सैनिकों को संगठित किया और बुंदेलखंड क्षेत्र में विद्रोह की कमान संभाली। आक्रमणकारी सेना का कड़ा प्रतिरोध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई ने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि 17 जून 1858 को ग्वालियर के फूलबाग के पास कोटा की सराय में अंग्रेजों से युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुई।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें