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शनिवार, 1 जुलाई 2023

कोल्ड्रिंक कि मिठास दे सकती है कैंसर का उपहार

cold drink

आजकल लोग चीनी के इस्तेमाल से बच रहे हैं, लेकिन आर्टिफिशल यानी कृत्रिम मीठे पदार्थ का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। कोल्ड्रिंक और फूड आइटम्स में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशल स्वीटनर को लोग ये समझ, इस्तेमाल करते हैं कि ये सिर्फ स्वाद के लिए है तो शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हम आपको बता दें वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक संस्था की रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक आर्टिफिशल स्वीटनर स्पॉटेड कैंसर का कारण बन सकता है। इसका इस्तेमाल कई कोल्ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक और डाइट सोडा में किया जाता है। च्युइंग गम और कई नॉन शुगर मीठे उत्पादों में भी आर्टिफिशल स्वीटनर का इस्तेमाल होता है। डायबिटीज के मरीज भी आर्टिफिशल स्वीटनर का इस्तेमाल करते हैं। एस्पर्टिन सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशल ट्रांसमिटेड हैं। इंटरनेशनल एजेंसी जुलाई में आर्टिफिशल स्वीटनर के खिलाफ कदम उठा सकता है। एस्पर्टिन को कार्सिनोजेनिक घोषित किया जा सकता है। यानी ऐसी पार्टियों को कैंसर का कारण बनने वाले संभावित तत्वों की सूची में डाला जा सकता है। आर्टिफिशल स्वीटनर का प्रयोग करने वाली कंपनियां आईएआरसी के दावे को खारिज कर रहीं है।



























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