हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गगनयान मिशन की प्रगति का आकलन करने और भारतीय अंतरिक्ष अन्वेषण के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के बाद प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष एजेंसी 'इसरो' के लिए दो नए लक्ष्यों की घोषणा की।
- 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना
- 2040 तक चंद्रमा पर पहले भारतीय को ले जाना
इसके लिए अंतरिक्ष विभाग चंद्रमा की खोज के लिए एक रोडमैप बनाएगा। इस रोडमैप में चंद्रयान मिशनों की एक श्रृंखला, एक नई पीढ़ी के लॉन्च वाहन का विकास, एक नए लॉन्च पैड का निर्माण, मानव-केंद्रित प्रयोगशालाओं और संबंधित प्रौद्योगिकियों की स्थापना शामिल होगी। साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा अंतरग्रहीय मिशनों की दिशा में काम किया जाएगा जिसमें शुक्र की कक्षा में जाने वाला एक अंतरिक्ष यान और मंगल ग्रह पर उतरने वाला एक यान भी शामिल है। गौरतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, कनाडा, जापान और यूरोपीय एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित और रख-रखाव किया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) सबसे बड़ा अंतरिक्ष स्टेशन है। लेकिन बढ़ती लागत और साझेदार देशों के बीच असहमति के कारण 2030 तक इसके बंद होने की उम्मीद है। इसलिए भारत इस दिशा में अपनी कार्ययोजना बना रहा है।
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