वैज्ञानिकों ने अब चंद्रमा की सतह पर निर्माण के लिए एक नई तकनीक खोजने का दावा किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक़ इस नई तकनीक में चंद्र धूल/मिट्टी, जिसमें मुख्य रूप से गहरी भूरी चंद्र ज्वालामुखी चट्टान शामिल हैं। इसे संभावित रूप से चंद्रमा पर सड़कों और लैंडिंग पैड के निर्माण हेतु कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। यह खोज पृथ्वी पर किए गए प्रयोगों पर आधारित है, जहाँ नकली चंद्रमा मिट्टी को बड़े लेंस के ज़रिये कंसनट्रेटिड सन लाइट के संपर्क में लाया गया। अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा विकसित EAC- 1A नामक एक महीन दाने वाली सामग्री के साथ प्रयोग किया। इसका मक़सद, यह जाँच करना था कि केंद्रित सूर्य की रोशनी चंद्र धूल को ठोस चट्टान स्लैब में पिघलाने में सक्षम है या नहीं। दरअसल, चंद्र धूल की कठोर प्रकृति और इलेक्ट्रिकल चार्ज, अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए चुनौतियाँ पैदा करते हैं। जिसके समाधान स्वरूप वैज्ञानिकों ने कंसनट्रेटिड सन लाइट का इस्तेमाल कर धूल/मिट्टी का ठोस चट्टान स्लैब बनाया। इसके बाद उन्होंने सफलतापूर्वक ऐसी टाइल्स बनाईं, जो आपस में जुड़कर चंद्रमा पर सड़कों और लैंडिंग पैड के निर्माण हेतु ठोस सतह बना सकती थीं। ये टाइल्स लगभग 9.8 इंच (25 सेमी) चौड़ी और लगभग 1 इंच (2.5 मिलीमीटर) तक मोटी मापी गईं। ग़ौरतलब है कि पृथ्वी के विपरीत, चंद्रमा में हवा और पानी के कारण होने वाली क्षरण प्रक्रियाओं का अभाव है, जिसके कारण इसकी मिट्टी में तेज़ धार वाले कण मौजूद होते हैं।
वैज्ञानिकों ने अब चंद्रमा की सतह पर निर्माण के लिए एक नई तकनीक खोजने का दावा किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक़ इस नई तकनीक में चंद्र धूल/मिट्टी, जिसमें मुख्य रूप से गहरी भूरी चंद्र ज्वालामुखी चट्टान शामिल हैं। इसे संभावित रूप से चंद्रमा पर सड़कों और लैंडिंग पैड के निर्माण हेतु कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। यह खोज पृथ्वी पर किए गए प्रयोगों पर आधारित है, जहाँ नकली चंद्रमा मिट्टी को बड़े लेंस के ज़रिये कंसनट्रेटिड सन लाइट के संपर्क में लाया गया। अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा विकसित EAC- 1A नामक एक महीन दाने वाली सामग्री के साथ प्रयोग किया। इसका मक़सद, यह जाँच करना था कि केंद्रित सूर्य की रोशनी चंद्र धूल को ठोस चट्टान स्लैब में पिघलाने में सक्षम है या नहीं। दरअसल, चंद्र धूल की कठोर प्रकृति और इलेक्ट्रिकल चार्ज, अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए चुनौतियाँ पैदा करते हैं। जिसके समाधान स्वरूप वैज्ञानिकों ने कंसनट्रेटिड सन लाइट का इस्तेमाल कर धूल/मिट्टी का ठोस चट्टान स्लैब बनाया। इसके बाद उन्होंने सफलतापूर्वक ऐसी टाइल्स बनाईं, जो आपस में जुड़कर चंद्रमा पर सड़कों और लैंडिंग पैड के निर्माण हेतु ठोस सतह बना सकती थीं। ये टाइल्स लगभग 9.8 इंच (25 सेमी) चौड़ी और लगभग 1 इंच (2.5 मिलीमीटर) तक मोटी मापी गईं। ग़ौरतलब है कि पृथ्वी के विपरीत, चंद्रमा में हवा और पानी के कारण होने वाली क्षरण प्रक्रियाओं का अभाव है, जिसके कारण इसकी मिट्टी में तेज़ धार वाले कण मौजूद होते हैं।

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