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मंगलवार, 7 जनवरी 2025

इंश्योरेंस सेक्टर की बड़ी उम्मीदें: 2025 के बजट से क्या बदलाव होंगे?

Insurance

2025 के यूनियन बजट में भारतीय हेल्थ सेक्टर की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार ऐसे फैसले ले, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोग हेल्थ इंश्योरेंस के लिए प्रेरित हों। खासतौर पर, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST कम करने और सेक्शन 80D के तहत टैक्स छूट बढ़ाने की मांग की जा रही है। 2024 में भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों की परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। कुछ कंपनियों ने अच्छा मुनाफा कमाया, तो कुछ को नुकसान भी हुआ।
2024 में अगर हम इंश्योरेंस कंपनियों का परफॉर्मेंस देखें, तो General Insurance Corporation of India (GIC) ने 44% का शानदार रिटर्न दिया। ICICI Lombard और ICICI Prudential Life Insurance ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं दूसरी ओर, Life Insurance Corporation (LIC) का रिटर्न केवल 7% रहा। कुछ कंपनियां जैसे SBI Life, HDFC Life और Star Health को नुकसान हुआ। इससे साफ होता है कि बीमा सेक्टर के हालात अलग-अलग हैं।
अब, इंश्योरेंस सेक्टर को उम्मीद है कि बजट 2025 में कुछ महत्वपूर्ण सुधार किए जाएंगे, जो बीमा लेने वालों और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद होंगे। आइए जानते हैं कि बीमा सेक्टर की क्या बड़ी मांगें हैं:

हेल्थ इंश्योरेंस पर GST घटाने की मांग

इंश्योरेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस पर GST की दर को घटाया जाए। फिलहाल, हेल्थ इंश्योरेंस पर 18% GST लगता है, जो बीमा को महंगा बनाता है। अगर GST कम किया जाए, तो इससे हेल्थ बीमा ज़्यादा लोगों तक पहुंचेगा और लोग इसे लेने के लिए प्रेरित होंगे। इससे हेल्थ इंश्योरेंस का उपयोग बढ़ेगा और ज़्यादा लोगों को इससे फायदा होगा।

सेक्शन 80D में सुधार की मांग

सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स छूट मिलती है, लेकिन यह छूट फिलहाल बहुत सीमित है। उद्योग की मांग है कि इसे 25,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया जाए, ताकि लोग ज़्यादा हेल्थ इंश्योरेंस ले सकें। खासकर सीनियर सिटिजंस के लिए यह छूट बढ़ाकर 1,00,000 रुपये तक की जानी चाहिए। इसके अलावा, यह छूट नए टैक्स रिजीम में भी लागू होनी चाहिए।

अलग हॉस्पिटल रेगुलेटर बनाने की जरूरत

बीमा कंपनियों के सामने एक बड़ी चुनौती मेडिकल इंफ्लेशन (इलाज का बढ़ता खर्च) है। मतलब, अस्पतालों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। बीमा कंपनियां केवल तीन साल में एक बार अपने प्रोडक्ट्स के प्राइस बदल सकती हैं। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि अस्पतालों के खर्च को नियंत्रित करने के लिए एक अलग रेगुलेटर बॉडी बनाई जाए, जिससे अस्पतालों की सर्विस और फीस में पारदर्शिता आए और बीमा कंपनियों के लिए प्रोडक्ट की कीमत तय करना आसान हो।

लाइफ इंश्योरेंस पर अलग से टैक्स रिबेट

बीमा कंपनियों का मानना है कि लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए एक अलग से टैक्स छूट दी जाए। फिलहाल यह छूट सेक्शन 80C के तहत दी जाती है। अगर इसे अलग किया जाए, तो इससे लोग ज़्यादा जीवन बीमा खरीदेंगे, जिससे बीमाधारकों को फायदा होगा और इंश्योरेंस सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा।

इनकम टैक्स स्लैब और छूट में बदलाव

इंश्योरेंस सेक्टर की एक और मांग है कि इनकम टैक्स स्लैब और छूट सीमाओं पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि लोगों के पास ज़्यादा डिस्पोजेबल इनकम हो। इससे लोग ज़्यादा इंश्योरेंस में निवेश कर पाएंगे, और इंश्योरेंस की मार्केट में बढ़ोतरी होगी। इस बदलाव से न केवल इंश्योरेंस सेक्टर को फायदा होगा, बल्कि लोगों को भी बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।
2025 के बजट में अगर इन सुधारों पर ध्यान दिया जाता है, तो इससे हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी और अधिक लोग इस सेक्टर का फायदा उठा पाएंगे।

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