आज यानी 9 मई को भारतीय राष्ट्रगान के रचयिता बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बहुमुखी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर को गुरुदेव कविगुरु विश्वकवि नामों से भी जाना जाता है। इनका जन्म 9 मई 1861 को तत्कालीन कलकत्ता में हुआ था। ये विश्व विख्यात कवि साहित्यकार नाटककार, संगीतकार और दार्शनिक थे। रविना टैगोर ने लंदन विश्विद्यालय से कानून की पढ़ाई की, लेकिन वर्ष 1880 में बिना डिग्री लिए भारत वापस लौट आए। 1913 में इन्होने अपने महाकाव्य गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल जीता। साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय वह पहले रेडियो रूपी विजेता बने। टैगोर ने ही गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी थी। 1915 में किंग जॉर्ज पंचम ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया, लेकिन 1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में उन्होनें ये उपाधि लौटा दी। 7 अगस्त 1941 को इनका निधन हो गया। रवीन्द्र संगीत बांग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग है। उनकी अधिकतर रचनाएं उनके गीतों में भी शामिल हैं। ये एक मात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। पहला भारत का जनगणमन तथा बांग्लादेश का आमार सोनार बांग्ला।
आज यानी 9 मई को भारतीय राष्ट्रगान के रचयिता बंगाली कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बहुमुखी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर को गुरुदेव कविगुरु विश्वकवि नामों से भी जाना जाता है। इनका जन्म 9 मई 1861 को तत्कालीन कलकत्ता में हुआ था। ये विश्व विख्यात कवि साहित्यकार नाटककार, संगीतकार और दार्शनिक थे। रविना टैगोर ने लंदन विश्विद्यालय से कानून की पढ़ाई की, लेकिन वर्ष 1880 में बिना डिग्री लिए भारत वापस लौट आए। 1913 में इन्होने अपने महाकाव्य गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल जीता। साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय वह पहले रेडियो रूपी विजेता बने। टैगोर ने ही गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी थी। 1915 में किंग जॉर्ज पंचम ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया, लेकिन 1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में उन्होनें ये उपाधि लौटा दी। 7 अगस्त 1941 को इनका निधन हो गया। रवीन्द्र संगीत बांग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग है। उनकी अधिकतर रचनाएं उनके गीतों में भी शामिल हैं। ये एक मात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। पहला भारत का जनगणमन तथा बांग्लादेश का आमार सोनार बांग्ला।
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