हाल ही में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानि जीएसआई ने राजस्थान के नागौर में लिथियम के महा भंडार का पता लगाया है। जम्मू कश्मीर के बाद देश में लिथियम की ये दूसरी खोज है। इससे पहले फरवरी 2023 में जम्मू कश्मीर में भारत का पहला लिथियम रिजर्व पाया गया था। अब राजस्थान के डेगाना नागौर में इस महत्पूर्ण खनिज का एक ओर रिजर्व पाया गया है। नया रिजर्व जम्मू कश्मीर में पाए गए रिजर्व से काफी बड़ा आंका जा रहा है। आंकड़ो के मुताबिक यहां मिले भंडार में मौजूद लीथियम की मात्रा भारत की कुल मांग का 80% पूरा कर सकती है। साथ ही ये खोज लिथियम के लिए चीन पर भारत की निर्भरता को कम करने में भी मददगार हो सकती है। गौरतलब है कि डेगाना वही स्थान है जहां अंग्रेज़ों ने सन 1914 में रेनवाल की पहाड़ी पर टंगस्टन खनिज की खोज की थी। बात करें लिथियम के बारे में तो ये अलौह धातु है लिथियम दुनिया की सबसे नरम और हल्की धातु भी है। ये रासायनिक ऊर्जा को संग्रहीत कर इसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। इसका उपयोग मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक वाहन व अन्य चार्जेबल बैटरी बनाने में किया जाता है। उपयोगिता वैश्विक मांग के कारण इसे वाइट कोल भी कहा जाता है। विश्व बैंक के अनुसार वर्ष 2050 तक लिथियम की वैश्विक मांग में 500% की वृद्धि की संभावना है। कुछ अन्य प्रमुख तथ्यों पर नजर डालें तो 21 मिलियन टन का दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार वर्तमान में बोलीविया में है। इसके बाद अर्जेंटीना, चिली और अमेरिका में भी बड़े भण्डार हैं। वही चीन के पास 5.1 मिलियन टन लिथियम का भंडार है। लिथियम त्रिकोण में शामिल देश हैं अर्जेंटीना, बोलीविया, चिली। इन क्षेत्रों में 50% जमा राशि केन्द्रित है। बता दें कि भारत अब तक लिथियम के लिए चीन पर निर्भर है और अपने कुल लिथियम आयात का 53.76% हिस्सा चीन से खरीदता है। वर्ष 2020-21 में भारत ने 6000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के लिथियम का आयात किया था।
हाल ही में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानि जीएसआई ने राजस्थान के नागौर में लिथियम के महा भंडार का पता लगाया है। जम्मू कश्मीर के बाद देश में लिथियम की ये दूसरी खोज है। इससे पहले फरवरी 2023 में जम्मू कश्मीर में भारत का पहला लिथियम रिजर्व पाया गया था। अब राजस्थान के डेगाना नागौर में इस महत्पूर्ण खनिज का एक ओर रिजर्व पाया गया है। नया रिजर्व जम्मू कश्मीर में पाए गए रिजर्व से काफी बड़ा आंका जा रहा है। आंकड़ो के मुताबिक यहां मिले भंडार में मौजूद लीथियम की मात्रा भारत की कुल मांग का 80% पूरा कर सकती है। साथ ही ये खोज लिथियम के लिए चीन पर भारत की निर्भरता को कम करने में भी मददगार हो सकती है। गौरतलब है कि डेगाना वही स्थान है जहां अंग्रेज़ों ने सन 1914 में रेनवाल की पहाड़ी पर टंगस्टन खनिज की खोज की थी। बात करें लिथियम के बारे में तो ये अलौह धातु है लिथियम दुनिया की सबसे नरम और हल्की धातु भी है। ये रासायनिक ऊर्जा को संग्रहीत कर इसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। इसका उपयोग मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक वाहन व अन्य चार्जेबल बैटरी बनाने में किया जाता है। उपयोगिता वैश्विक मांग के कारण इसे वाइट कोल भी कहा जाता है। विश्व बैंक के अनुसार वर्ष 2050 तक लिथियम की वैश्विक मांग में 500% की वृद्धि की संभावना है। कुछ अन्य प्रमुख तथ्यों पर नजर डालें तो 21 मिलियन टन का दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम भंडार वर्तमान में बोलीविया में है। इसके बाद अर्जेंटीना, चिली और अमेरिका में भी बड़े भण्डार हैं। वही चीन के पास 5.1 मिलियन टन लिथियम का भंडार है। लिथियम त्रिकोण में शामिल देश हैं अर्जेंटीना, बोलीविया, चिली। इन क्षेत्रों में 50% जमा राशि केन्द्रित है। बता दें कि भारत अब तक लिथियम के लिए चीन पर निर्भर है और अपने कुल लिथियम आयात का 53.76% हिस्सा चीन से खरीदता है। वर्ष 2020-21 में भारत ने 6000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के लिथियम का आयात किया था।
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