28 मई को प्रधानमंत्री ने संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और इसी के साथ सिंगोल को ग्रहण कर उसे नए संसद भवन में स्थापित करेंगे। ये वही सिंगोल है जिसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 को ग्रहण किया था। ये अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में ग्रहण किया गया था। सिंगोल की स्थापना 15 अगस्त 1947 की भावना को अविस्मरणीय बनाती है। 1947 के सिंगोल को लोक सभा में अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया जाएगा। इसे राष्ट्र के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा और विशेष अवसरों पर बाहर ले जाया जाएगा। अब बात करें सिंगोल की तो ये एक प्रकार का राजदंड है जो न्यायपूर्ण और निष्पक्ष शासन के पवित्र प्रतीक को दर्शाता है। ये राजदंड पाँच फीट लंबा है और इसके शीश पर नंदी बैल है जो न्याय का प्रतीक है। इसे बुम्बईदू, एथिराजलू और बुम्बईदी सुधाकर द्वारा निर्मित किया गया था। सिंगोल तमिल शब्द सेमल से लिया गया है, जिसका अर्थ है नीति परायणता या राजकीय नर्स सिंगोल को ग्रहण करने वाले व्यक्ति को न्याय पूर्ण और निष्पक्ष रूप से शासन करने का आदेश होता है। ये सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक को चिह्नित करता है।
28 मई को प्रधानमंत्री ने संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और इसी के साथ सिंगोल को ग्रहण कर उसे नए संसद भवन में स्थापित करेंगे। ये वही सिंगोल है जिसे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 14 अगस्त 1947 को ग्रहण किया था। ये अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में ग्रहण किया गया था। सिंगोल की स्थापना 15 अगस्त 1947 की भावना को अविस्मरणीय बनाती है। 1947 के सिंगोल को लोक सभा में अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया जाएगा। इसे राष्ट्र के देखने के लिए प्रदर्शित किया जाएगा और विशेष अवसरों पर बाहर ले जाया जाएगा। अब बात करें सिंगोल की तो ये एक प्रकार का राजदंड है जो न्यायपूर्ण और निष्पक्ष शासन के पवित्र प्रतीक को दर्शाता है। ये राजदंड पाँच फीट लंबा है और इसके शीश पर नंदी बैल है जो न्याय का प्रतीक है। इसे बुम्बईदू, एथिराजलू और बुम्बईदी सुधाकर द्वारा निर्मित किया गया था। सिंगोल तमिल शब्द सेमल से लिया गया है, जिसका अर्थ है नीति परायणता या राजकीय नर्स सिंगोल को ग्रहण करने वाले व्यक्ति को न्याय पूर्ण और निष्पक्ष रूप से शासन करने का आदेश होता है। ये सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक को चिह्नित करता है।
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