केंद्रीय मत्स्य पालन पशुपालन और डेरी मंत्री ने पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग जिलों में लंबी स्किन डिजीज संक्षिप्त में एलएसडी के बढ़ते मामलों की रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लंबी स्किन डिजीज मवेशियों में होने वाला एक संक्रामक रोग है जो कैप्री पॉक्स वायरस नामक वायरस के कारण होता है। यह आनुवंशिक रूप से गोट पॉक्स और शीत पॉक्स वायरस परिवार से संबंधित है। यह मुख्य रूप से खून पीने वाले कीड़ों जैसे वेक्टर के माध्यम से मवेशियों और जन भैसों को संक्रमित करता है। ऐतिहासिक रूप से यह अफ्रीका तक ही सीमित रहा है, जहां से पहली बार 1929 में खोजा गया था। ये पहली बार एशिया प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2019 में उत्तर पश्चिम चीन, बांग्लादेश आदि में देखा गया था। भारत में पहली बार ये रोग 2022 में फैला था, जिसके परिणामस्वरूप तीन महीनों के भीतर 97,000 से अधिक मवेशियों की मौत हो गई थी। यूरोप दुनिया भर में पशुधन के लिए उभरता हुआ खतरा बना हुआ है।
लक्षण
जानवर की खाल या त्वचा पर गोलाकार और सख्त गांठों का दिखना, अत्यधिक नाक और लार का स्राव होना प्रभावित पशु की भूख कम होना और रहने खाने में कठिनाई होना जिससे दुग्ध उत्पादन कम हो जाना शामिल है। यह मच्छरों मक्खियों टिक्स और लार एवं दूषित पानी तथा भोजन के माध्यम से भी फैलता है। खाद्य और कृषि संगठन यानी एफएओ उनका अनुमान है कि इसकी मृत्युदर 10% से कम है। ये रोग जूनोटिक नहीं है, अर्थात जानवरों से मनुष्यों में नहीं फैलता है। इस तरह मनुष्य के संक्रमण से बचे हुए हैं।
इलाज
इस बीमारी का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। इसलिए टीकाकरण द्वारा रोकथाम इसके नियंत्रण का सबसे प्रभावी साधन है। इसका सफल नियंत्रण और उन्मूलन तेजी से और व्यापक टीकाकरण अभियान के बाद शीघ्र पहचान पर निर्भर करता है। एक बार एक मवेशी के ठीक हो जाने के बाद ये मवेशी पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है, जिससे या अन्य जानवरों के लिए संक्रमण का कारण नहीं बनता।

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