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मंगलवार, 9 मई 2023

अब आलइंडिया रेडियो होगा सिर्फ आकाशवाणी

Akashvani

हाल ही में केन्द्र ने आलइंडिया रेडियो यानि एआईआर के संदर्भ में एक आदेश जारी किया। इसके मुताबिक सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती द्वारा अपनी रेडियो सेवा के संदर्भ में आलइंडिया रेडियो के नाम के स्थान पर इसे आकाशवाणी करने का फैसला किया गया है। आदेश में कहा गया है कि सार्वजनिक प्रसारक एआईआर को सभी प्रसारणों और कार्यक्रमों में विशेष रूप से आकाशवाणी के रूप में संदर्भित किया जाए। इससे पहले इन दो नामों का परस्पर उपयोग किया जाता था। आदेशानुसार यह सरकार का पुराना फैसला है जो अब लागू किया जा रहा है। ये कदम संसद द्वारा पारित प्रसार भारती अधिनियम 1990 के अनुरूप है। आपको बता दें कि आलइंडिया रेडियो आधिकारिक तौर पर 1936 में अस्तित्व में आया था। इसका आकाशवाणी नाम 1956 में बनाया गया था। आकाशवाणी नाम आमतौर पर इसके हिन्दी प्रसारण को संदर्भित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा था। अब ओलिविया रेडियो की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो भारत में बोम्बे के रेडियो क्लब ने 1923 में पहला व्यावसायिक प्रसारण किया। उसी वर्ष कलकत्ता रेडियो क्लब शुरू हुआ और एक साल बाद मद्रास प्रेसिडेंसी रेडियो क्लब के साथ रेडियो प्रसारण मद्रास पहुंचा। 1927 में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी यानि आईबीसी अस्तित्व में आई। लेकिन 1930 में दिवालिया होने का सामना करना पड़ा। 1930 में उद्योग और श्रम विभाग के तहत भारतीय राज्य प्रसारण सेवा यानी, आईएस बी एस ने प्रायोगिक तौर पर संचालन शुरू किया। इसके बाद 8 जून 1936 को आईएसबी एस। आलइंडिया रेडियो बन गया। आलइंडिया रेडियो या एआईआर सूचना प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इससे जुड़े कुछ अन्य प्रमुख तथ्यों की बात करें तो स्वतंत्रता के समय भारत में दिल्ली, लखनऊ, बॉम्बे मद्रास और त्रिचि रेडियो स्टेशन बचे थे, जबकि तीन अन्य पेशावर, लाहौर और ढाका चले गए थे। कवरेज के संदर्भ में ये देश की केवल 11% जनसंख्या को कवर करता था, लेकिन वर्तमान में 262 से अधिक रेडियो स्टेशनों के नेटवर्क के साथ इसकी भारत के 92 प्रतशित क्षेत्र और इसकी लगभग पूरी आबादी तक पहुंचे और दुनिया के प्रसारण 1977 में चेन्नई में शुरू हुआ। वर्तमान में एआईआर 18 स्टीरियो चैनल बड़े पैमाने पर शहरी दर्शकों तक उपलब्ध है।

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