हर साल 31 मई को दुनियाभर में तंबाकू निषेध दिवस या विश्व तंबाकू निषेध दिवस यानि वर्ल्ड नो टोबैको डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और तंबाकू के सेवन को कम करने के लिए प्रभावी नीतियों की वकालत करना है। 2023 के लिए इस दिवस की थीम है ग्रो फूड नॉट टोबैको। ये दिन तंबाकू और इसके कारण होने वाले रोकथाम योग्य मृत्यु व बीमारी पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1987 में तंबाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला लिया था। इसके बाद पहली बार वर्ल्ड नो टोबैको डे, 31 मई 1988 को मनाया गया, गौरतलब है कि तंबाकू इसे उगाने और खाने वाले दोनों की सेहत पर हानिकारक प्रभाव डालता है। तंबाकू में खैनी, गुटका, सुपारी आदि जैसे उत्पाद शामिल हैं। धूम्रपान दुनिया भर में तंबाकू उपयोग का सबसे आम रूप है। तंबाकू दुनिया के सामने सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक है और इससे हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। तंबाकू महामारी को संबोधित करने के लिए डब्ल्यूएचओ के सदस्य राज्य ने 2003 में डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन और टोबैको कंट्रोल यानि डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी को अपनाया। ज्ञातव्य है कि तंबाकू दुनिया में आर्थिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण कृषि फसलों में से एक है। भारत तंबाकू के प्रमुख निर्यातकों में से एक है और ब्राजील के बाद दूसरे स्थान पर है।
हर साल 31 मई को दुनियाभर में तंबाकू निषेध दिवस या विश्व तंबाकू निषेध दिवस यानि वर्ल्ड नो टोबैको डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और तंबाकू के सेवन को कम करने के लिए प्रभावी नीतियों की वकालत करना है। 2023 के लिए इस दिवस की थीम है ग्रो फूड नॉट टोबैको। ये दिन तंबाकू और इसके कारण होने वाले रोकथाम योग्य मृत्यु व बीमारी पर वैश्विक ध्यान आकर्षित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1987 में तंबाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला लिया था। इसके बाद पहली बार वर्ल्ड नो टोबैको डे, 31 मई 1988 को मनाया गया, गौरतलब है कि तंबाकू इसे उगाने और खाने वाले दोनों की सेहत पर हानिकारक प्रभाव डालता है। तंबाकू में खैनी, गुटका, सुपारी आदि जैसे उत्पाद शामिल हैं। धूम्रपान दुनिया भर में तंबाकू उपयोग का सबसे आम रूप है। तंबाकू दुनिया के सामने सबसे बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक है और इससे हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। तंबाकू महामारी को संबोधित करने के लिए डब्ल्यूएचओ के सदस्य राज्य ने 2003 में डब्ल्यूएचओ फ्रेमवर्क कन्वेंशन और टोबैको कंट्रोल यानि डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी को अपनाया। ज्ञातव्य है कि तंबाकू दुनिया में आर्थिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण कृषि फसलों में से एक है। भारत तंबाकू के प्रमुख निर्यातकों में से एक है और ब्राजील के बाद दूसरे स्थान पर है।
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