दुनिया भर में हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस यानि वर्ल्ड अगेन चाइल्ड लेबर मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बाल श्रम के क्रूरता को समाप्त करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करना है। 2023 के लिए इस दिवस की थीम है। सभी के लिए सामाजिक न्याय बाल श्रम खत्म करो। यानि सोशल जस्टिस फॉर आल एंड चाइल्ड लेबर, चलेगा तो बाल श्रम निषेध दिवस के बारे में इस दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आईएलओ द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी। इसका मकसद बाल श्रम के खिलाफ विश्वव्यापी आन्दोलन को बढ़ावा देना था। गौरतलब है कि बाल श्रम मौलिक मानव अधिकारों का उल्लंघन है। बाल श्रम आमतौर पर मजदूरी के भुगतान के बिना भुगतान के साथ बच्चों से शारारिक कार्य कराना है। वर्तमान में दुनियाभर में करीब 160 मिलियन बच्चे बाल श्रम में संलग्न हैं। अफ्रीका बाल श्रम में बच्चों के प्रतिशत और बाल श्रम में बच्चों की कुल संख्या यानी लगभग 72 मिलियन दोनों में सर्वोच्च स्थान पर है। इन दोनों मानकों में एशिया प्रशांत क्षेत्र दूसरे स्थान पर है। इस दिशा में भारत के प्रयासों में बाल श्रम निषेध और विनियमन अधिनियम 1986 लाया गया था। ये गुरूपद स्वामी समिति की सिफारिशों के आधार पर अधिनियमित किया गया था। 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी अवैध पैसे व किसी भी वशिष्ट प्रक्रियाओं में नियोजन को निषेध करता है। अब बात अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन यानी इंटरनेशल लेबर आर्गनाइजेशन या आईएलओ की, आईएलओ के स्थापना वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा हुई थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य वैश्विक एवं स्थायी शांति हेतु सामाजिक न्याय आवश्यक है। इसके लिए किया गया था। 1946 में यह संयुक्त राष्ट्र कि एक विशेष एजेंसी बन गया। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड जिनेवा में स्थित है। ये तीन मुख्य निकायों, सरकारों, नियोक्ताओं एवं श्रमिकों के प्रतिनिधियों के जरिये कार्य संपन्न करता है।
दुनिया भर में हर साल 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस यानि वर्ल्ड अगेन चाइल्ड लेबर मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बाल श्रम के क्रूरता को समाप्त करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करना है। 2023 के लिए इस दिवस की थीम है। सभी के लिए सामाजिक न्याय बाल श्रम खत्म करो। यानि सोशल जस्टिस फॉर आल एंड चाइल्ड लेबर, चलेगा तो बाल श्रम निषेध दिवस के बारे में इस दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आईएलओ द्वारा वर्ष 2002 में की गई थी। इसका मकसद बाल श्रम के खिलाफ विश्वव्यापी आन्दोलन को बढ़ावा देना था। गौरतलब है कि बाल श्रम मौलिक मानव अधिकारों का उल्लंघन है। बाल श्रम आमतौर पर मजदूरी के भुगतान के बिना भुगतान के साथ बच्चों से शारारिक कार्य कराना है। वर्तमान में दुनियाभर में करीब 160 मिलियन बच्चे बाल श्रम में संलग्न हैं। अफ्रीका बाल श्रम में बच्चों के प्रतिशत और बाल श्रम में बच्चों की कुल संख्या यानी लगभग 72 मिलियन दोनों में सर्वोच्च स्थान पर है। इन दोनों मानकों में एशिया प्रशांत क्षेत्र दूसरे स्थान पर है। इस दिशा में भारत के प्रयासों में बाल श्रम निषेध और विनियमन अधिनियम 1986 लाया गया था। ये गुरूपद स्वामी समिति की सिफारिशों के आधार पर अधिनियमित किया गया था। 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी अवैध पैसे व किसी भी वशिष्ट प्रक्रियाओं में नियोजन को निषेध करता है। अब बात अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन यानी इंटरनेशल लेबर आर्गनाइजेशन या आईएलओ की, आईएलओ के स्थापना वर्ष 1919 में वर्साय की संधि द्वारा हुई थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य वैश्विक एवं स्थायी शांति हेतु सामाजिक न्याय आवश्यक है। इसके लिए किया गया था। 1946 में यह संयुक्त राष्ट्र कि एक विशेष एजेंसी बन गया। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड जिनेवा में स्थित है। ये तीन मुख्य निकायों, सरकारों, नियोक्ताओं एवं श्रमिकों के प्रतिनिधियों के जरिये कार्य संपन्न करता है।
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