नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन यानि नेशनल ट्रेनिंग कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। ये इस प्रकार का पहला सम्मेलन है। इसका उद्देश्य देश भर में प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और प्रशासनिक अधिकारियों हेतु प्रशिक्षण संरचना को मजबूत करना है। इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन क्षमता निर्माण आयोग यानि सीबीसी द्वारा किया जा रहा है। ये विचारों के आदान प्रदान को बढ़ावा देकर सामना की जा रही चुनौतियों व उपलब्ध अवसरों की पहचान करेगा। साथ ही क्षमता निर्माण हेतु कार्रवाई योग्य समाधान पेश कर, व्यापक रणनीति तैयार करने में मददगार होगा। सम्मेलन में केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों, क्षेत्रीय व मंडल प्रशिक्षण संस्थानों तथा अनुसंधान संस्थानों सहित प्रशिक्षण संस्थानों के 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में आठ पैनल चर्चाओं में से प्रत्येक प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण संस्थानों से संबंधित प्रमुख विषयों, जैसे संकाय, विकास प्रशिक्षण, प्रभाग मूल्यांकन व कंटेंट डिजिटलीकरण आदि पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। प्रशासनिक सेवाओं के क्षमता निर्माण के जरिये देश में शासन प्रक्रिया व नीति कर्मण्य सुधार विजन के तहत मिशन योगी कर्मयोगी की शुरुआत की गई। यह सम्मेलन इसी दिशा में एक और कदम है। अब बात करे मिशन कर्मयोगी की तो इस किसी बात सितंबर 2020 में की गई थी। ये राष्ट्रीय प्रशासनिक सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम यानि एनपीसी एसीबी के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उदेश्य प्रभावी और कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण हेतु सामंजस समेत देश की प्राथमिकताओं की साझा समझ के साथ भारतीय लोकाचार में निहित एक सक्षम सिविल सेवा का निर्माण करना है। इस मिशन के अंतर्गत दो निकाय है जिन्हें मिशन कर्मयोगी कार्य करने के लिए सौंपा गया है। अर्थात कर्मयोगी भारत और क्षमता निर्माण आयोग, जो सभी लोकसेवकों के लिए सीखने में तेजी लाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। अब बात करे सीबीईसी यानि क्षमता निर्माण आयोग की तो इसका गठन 1 अप्रैल 2021 को भारत के राजपत्र के माध्यम से किया गया था। यह सिविल सेवा क्षमता निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन यानि नेशनल ट्रेनिंग कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। ये इस प्रकार का पहला सम्मेलन है। इसका उद्देश्य देश भर में प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और प्रशासनिक अधिकारियों हेतु प्रशिक्षण संरचना को मजबूत करना है। इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन क्षमता निर्माण आयोग यानि सीबीसी द्वारा किया जा रहा है। ये विचारों के आदान प्रदान को बढ़ावा देकर सामना की जा रही चुनौतियों व उपलब्ध अवसरों की पहचान करेगा। साथ ही क्षमता निर्माण हेतु कार्रवाई योग्य समाधान पेश कर, व्यापक रणनीति तैयार करने में मददगार होगा। सम्मेलन में केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों, क्षेत्रीय व मंडल प्रशिक्षण संस्थानों तथा अनुसंधान संस्थानों सहित प्रशिक्षण संस्थानों के 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में आठ पैनल चर्चाओं में से प्रत्येक प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण संस्थानों से संबंधित प्रमुख विषयों, जैसे संकाय, विकास प्रशिक्षण, प्रभाग मूल्यांकन व कंटेंट डिजिटलीकरण आदि पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। प्रशासनिक सेवाओं के क्षमता निर्माण के जरिये देश में शासन प्रक्रिया व नीति कर्मण्य सुधार विजन के तहत मिशन योगी कर्मयोगी की शुरुआत की गई। यह सम्मेलन इसी दिशा में एक और कदम है। अब बात करे मिशन कर्मयोगी की तो इस किसी बात सितंबर 2020 में की गई थी। ये राष्ट्रीय प्रशासनिक सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम यानि एनपीसी एसीबी के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उदेश्य प्रभावी और कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण हेतु सामंजस समेत देश की प्राथमिकताओं की साझा समझ के साथ भारतीय लोकाचार में निहित एक सक्षम सिविल सेवा का निर्माण करना है। इस मिशन के अंतर्गत दो निकाय है जिन्हें मिशन कर्मयोगी कार्य करने के लिए सौंपा गया है। अर्थात कर्मयोगी भारत और क्षमता निर्माण आयोग, जो सभी लोकसेवकों के लिए सीखने में तेजी लाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। अब बात करे सीबीईसी यानि क्षमता निर्माण आयोग की तो इसका गठन 1 अप्रैल 2021 को भारत के राजपत्र के माध्यम से किया गया था। यह सिविल सेवा क्षमता निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
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