हाल ही में इसरो-अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (अहमदाबाद) ने नींदकारा में नभमित्र डिवाइस का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया था। यह एक उपग्रह-आधारित संचार प्रणाली है। इसे मछुआरों की सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है। यह डिवाइस समुद्र से और समुद्र तक दो-तरफ़ा संदेश सेवाओं को सक्षम बनाएगी। इसके द्वारा मछुआरों को स्थानीय भाषा में मौसम और चक्रवात की चेतावनी दी जाएगी। इसके साथ ही नावें अधिकारियों को संकट संदेश भी भेज सकती हैं। नाव पलटने और आग लगने जैसी आपातकालीन स्थितियों में, मछुआरे इस डिवाइस पर मौजूद बटन दबाकर नियंत्रण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। बटन दबाने पर नियंत्रण केंद्र को नाव के स्थान सहित एक अलर्ट मिलेगा, जबकि नाव पर चालक दल को नियंत्रण केंद्र से एक प्रतिक्रिया संदेश प्राप्त होगा। यह उपकरण शिपिंग चैनलों और समुद्री सीमाओं के बारे में जानकारी प्रदान करेगा, साथ ही मछली पकड़ने के क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करेगा। आपकी जानकारी को बतादें कि इस उपकरण को नींदकारा में एक मछली पकड़ने वाले जहाज पर स्थापित किया गया है
हाल ही में इसरो-अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (अहमदाबाद) ने नींदकारा में नभमित्र डिवाइस का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया था। यह एक उपग्रह-आधारित संचार प्रणाली है। इसे मछुआरों की सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है। यह डिवाइस समुद्र से और समुद्र तक दो-तरफ़ा संदेश सेवाओं को सक्षम बनाएगी। इसके द्वारा मछुआरों को स्थानीय भाषा में मौसम और चक्रवात की चेतावनी दी जाएगी। इसके साथ ही नावें अधिकारियों को संकट संदेश भी भेज सकती हैं। नाव पलटने और आग लगने जैसी आपातकालीन स्थितियों में, मछुआरे इस डिवाइस पर मौजूद बटन दबाकर नियंत्रण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। बटन दबाने पर नियंत्रण केंद्र को नाव के स्थान सहित एक अलर्ट मिलेगा, जबकि नाव पर चालक दल को नियंत्रण केंद्र से एक प्रतिक्रिया संदेश प्राप्त होगा। यह उपकरण शिपिंग चैनलों और समुद्री सीमाओं के बारे में जानकारी प्रदान करेगा, साथ ही मछली पकड़ने के क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करेगा। आपकी जानकारी को बतादें कि इस उपकरण को नींदकारा में एक मछली पकड़ने वाले जहाज पर स्थापित किया गया है
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