हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक पॉलिफेनॉल से अल्जाइमर रोग का संभावित इलाज खोज निकाला है। चेस्टनट और ओक जैसे पेड़ों की टहनियों में पाया जाने वाले टेनिक एसिड जैसे प्राकृतिक रूप से प्रचुर मात्रा में उपलब्ध पौधा- आधारित पॉलिफेनॉल (पीपी) से फेरोप्टोसिस-एडी एक्सिस को नियंत्रित किया जा सकता है। यह अल्जाइमर रोग (एडी) का मुकाबला करने के लिये एक सुरक्षित, लागत प्रभावी रणनीति उपलब्ध हो सकती है। इससे दिमागी विकृति जैसे सामाजिक बोझ को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
आए जानते है, अल्जाइमर रोग के बारे में:-
यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट करता है। इसमें रोगी की शारीरिक और मानसिक स्थिति कमज़ोर हो जाती है, उसे कुछ भी याद नहीं रहता है, उसकी निर्णय लेने की क्षमता घट जाती है, स्वभाव में लगातार परिवर्तन होता रहता है, आदि। प्रारंभ में ये लक्षण कम मात्रा में होते हैं लेकिन, समय रहते इसका उपचार न कराया जाए तो यह गंभीर और असाध्य हो जाता है। 55-60 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों में अल्ज़ाइमर, डिमेंशिया का प्रमुख कारण है। ऐसा पाया गया है कि अल्ज़ाइमर रोग मस्तिष्क कोशिकाओं में और उसके आसपास प्रोटीन के असामान्य निर्माण का कारण होता है। इसमें शामिल प्रोटीनों में से एक को एमिलॉयड कहा जाता है, जिसके जमा होने से मस्तिष्क की कोशिकाओं के चारों ओर छोटे टुकड़े बनते हैं तथा दूसरे प्रोटीन को ताऊ कहा जाता है। ताऊ एक प्रकार का प्रोटीन है जो अल्ज़ाइमर रोगियों के मस्तिष्क में उलझी संरचनाओं में होता है, मस्तिष्क में एक-दूसरे के साथ संवाद करने के लिये न्यूरॉन्स की क्षमता को बाधित करता है। अल्ज़ाइमर लाइलाज बीमारी है, क्योंकि मस्तिष्क की कोशिकाओं को उनकी मृत्यु के पश्चात उन्हें पुनर्जीवित कर सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अल्ज़ाइमर रोग होने का खतरा अधिक होता है वर्तमान में अल्ज़ाइमर रोग का कोई ज्ञात इलाज नहीं है लेकिन इसकी रोकथाम के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं:-
- लोगों को मस्तिष्क स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करना
- व्यवहार लक्षणों का प्रबंधन
- रोग के लक्षणों को धीमा या विलंबित करना
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