हर साल 23 सितंबर को सांकेतिक भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य, बधिर लोगों के मानवाधिकारों की प्राप्ति की दिशा में सांकेतिक भाषा के महत्त्व के प्रति जागरूकता लाना है। इस वर्ष इस दिवस की थीम A World where Deaf People Everywhere can Sign Anywhere है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये इस विशेष दिन की घोषणा की गई थी। यह दिन 1951 में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ द डेफ(WFD) की स्थापना की तिथि को चिन्हित करता है। WFD एक अंतर्राष्ट्रीय ग़ैर-लाभकारी ग़ैर-सरकारी संगठन है। वर्तमान में इसके 133 सदस्य हैं। इसका उद्देश्य बधिर लोगों के मानवाधिकारों की प्राप्ति और संरक्षण को सुनिश्चित करना है। यह दिवस पहली बार 2018 में बधिरों के अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह के हिस्से के रूप में मनाया गया था। बधिरों का अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह पहली बार सितंबर 1958 में मनाया गया था। ग़ौरतलब है कि सांकेतिक भाषा में किसी बात को संकेत अथवा चेहरे के हाव-भाव के ज़रिये समझाया जाता है। विश्व बधिर फेडरेशन के अनुसार विश्व में 70 मिलियन से अधिक बधिर हैं। इनमें से 80% विकाशशील देशों में रहते हैं। सामूहिक रूप से वे 300 से अधिक विभिन्न सांकेतिक भाषाओं का उपयोग करते हैं।
हर साल 23 सितंबर को सांकेतिक भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य, बधिर लोगों के मानवाधिकारों की प्राप्ति की दिशा में सांकेतिक भाषा के महत्त्व के प्रति जागरूकता लाना है। इस वर्ष इस दिवस की थीम A World where Deaf People Everywhere can Sign Anywhere है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये इस विशेष दिन की घोषणा की गई थी। यह दिन 1951 में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ द डेफ(WFD) की स्थापना की तिथि को चिन्हित करता है। WFD एक अंतर्राष्ट्रीय ग़ैर-लाभकारी ग़ैर-सरकारी संगठन है। वर्तमान में इसके 133 सदस्य हैं। इसका उद्देश्य बधिर लोगों के मानवाधिकारों की प्राप्ति और संरक्षण को सुनिश्चित करना है। यह दिवस पहली बार 2018 में बधिरों के अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह के हिस्से के रूप में मनाया गया था। बधिरों का अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह पहली बार सितंबर 1958 में मनाया गया था। ग़ौरतलब है कि सांकेतिक भाषा में किसी बात को संकेत अथवा चेहरे के हाव-भाव के ज़रिये समझाया जाता है। विश्व बधिर फेडरेशन के अनुसार विश्व में 70 मिलियन से अधिक बधिर हैं। इनमें से 80% विकाशशील देशों में रहते हैं। सामूहिक रूप से वे 300 से अधिक विभिन्न सांकेतिक भाषाओं का उपयोग करते हैं।
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