हाल ही में शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने दुनिया के 8वें महाद्वीप का नक्शा जारी किया है। इस महाद्वीप को ज़ीलैंडिया नाम दिया गया है। इसे ते रिउ अ-मौई भी कहा जाता है। यह खोजा गया आठवाँ महाद्वीप सबसे छोटा, सबसे पतला और सबसे युवा महाद्वीप है। इससे संबंधित खोज अध्ययन और विस्तृत नक्शा टेक्टोनिक्स पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। ज़ीलैंडिया का अद्यतन मानचित्र न केवल ज्वालामुखी गतिविधि के स्थान का खुलासा करता है। बल्कि महाद्वीप की संरचना व अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषताओं की भी जानकारी प्रदान करता है। यह महाद्वीप 375 वर्षों तक ग़ायब रहा क्योंकि इसका लगभग 94% भाग जलमग्न है और खनिज भण्डारों से समृद्ध है। आए जानते है ज़ीलैंडिया के बारे में :
यह दक्षिण प्रशांत महासागर में डूबा हुआ महाद्वीप है। यह मूल रूप से प्राचीन गोंडवाना महाद्वीप का हिस्सा था, जो लगभग 1 अरब से 542 मिलियन वर्ष पहले अस्तित्व में था। गोंडवाना के क्षेत्र क्रमशः ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका बन गए। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ ज़ीलैंडिया मेडागास्कर से लगभग छह गुना बड़ा है। इसका क्षेत्रफल 1.89 मिलियन वर्ग मील या 4.9 मिलियन वर्ग किलोमीटर है। इसमें न्यूज़ीलैंड के अलावा न्यू कैलेडोनिया, नॉरफ़ॉक द्वीप, लॉर्ड होवे द्वीप समूह और एलिज़ाबेथ और मिडलटन चट्टानें भी शामिल हैं। भूवैज्ञानिकों ने इसकी खोज की घोषणा 2017 में की थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, ज़ीलैंडिया महाद्वीप का उद्भव अचानक हुई खोज नहीं बल्कि एक क्रमिक विकास है। आए जानते है कैसे पड़ा इसका नाम ज़ीलैंडिया:-
अमेरिकी भूभौतिकीविद् ब्रूस लुएन्डिक ने पहली बार 1995 में दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महाद्वीप के लिए ज़ीलैंडिया शब्द का इस्तेमाल किया था। यह न्यूज़ीलैंड के लिये प्रयोग किया गया लैटिन नाम है।
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