हर वर्ष 5 अक्टूबर को गोंड राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती मनाई जाती है। इनका जन्म 1524 ई. में कालिंजर (बांदा, उत्तर प्रदेश) के किले में हुआ था। इनका जन्म दुर्गाष्टमी के दिन हुआ था, इसलिए इनका नाम दुर्गावती पड़ा। 1542 में इनका विवाह गोंड राजवंश के राजा संग्रामशाह के सबसे बड़े पुत्र दलपतशाह से हुआ था। दलपत की मृत्यु के बाद रानी दुर्गावती ने गोंड राज्य का शासन संभाला। इन्होंने अपने राज्य की सीमाओं को सुदृढ़ किया और विद्रोहियों को कुचलने के लिये व्यक्तिगत तौर पर अपनी सेना का नेतृत्त्व किया। रानी दुर्गावती ने मालवा के शासक बाज़ बहादुर को खदेड़ा था। 1565 में आसफ़ खान के नेतृत्त्व में मुग़ल सेना ने गढ़-कटंगा पर हमला किया, जिसमें रानी की हार हुई। 24 जून, 1564 को रानी का निधन हो गया। इनके बलिदान को देखते हुए ही इस दिन को बलिदान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
हर वर्ष 5 अक्टूबर को गोंड राज्य की वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती मनाई जाती है। इनका जन्म 1524 ई. में कालिंजर (बांदा, उत्तर प्रदेश) के किले में हुआ था। इनका जन्म दुर्गाष्टमी के दिन हुआ था, इसलिए इनका नाम दुर्गावती पड़ा। 1542 में इनका विवाह गोंड राजवंश के राजा संग्रामशाह के सबसे बड़े पुत्र दलपतशाह से हुआ था। दलपत की मृत्यु के बाद रानी दुर्गावती ने गोंड राज्य का शासन संभाला। इन्होंने अपने राज्य की सीमाओं को सुदृढ़ किया और विद्रोहियों को कुचलने के लिये व्यक्तिगत तौर पर अपनी सेना का नेतृत्त्व किया। रानी दुर्गावती ने मालवा के शासक बाज़ बहादुर को खदेड़ा था। 1565 में आसफ़ खान के नेतृत्त्व में मुग़ल सेना ने गढ़-कटंगा पर हमला किया, जिसमें रानी की हार हुई। 24 जून, 1564 को रानी का निधन हो गया। इनके बलिदान को देखते हुए ही इस दिन को बलिदान दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
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